Omar Abdullah कैबिनेट में चार नए चेहरे शामिल, असंतोष के बाद Mubarak Gul बने नेकां महासचिव

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श्रीनगर के लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस फेरबदल के बाद 9 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़कर सात हो गया है। मंत्रिमंडल से बाहर रखे जाने पर छह बार के विधायक मुबारक गुल के समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय पर विरोध जताया, जिसके बाद उन्हें नया महासचिव बनाया गया।

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा मंगलवार को कश्मीर घाटी से चार नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर इसका विस्तार करने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और विरोध शुरू हो गया। वहीं, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंत्रिमंडल में ‘‘क्षेत्रीय और सांस्कृतिक असंतुलन’’ का हवाला देते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन पर निशाना साधा। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के चार नेताओं-- अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कल्लू) को यहां लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

मंत्रिमंडल में शामिल किए गए चारों नेता कश्मीर से हैं। इस विस्तार के बाद दो साल पुरानी सरकार की मंत्रिपरिषद में घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़ गया है। अब नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात मंत्री कश्मीर से हैं जबकि उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा जम्मू क्षेत्र के एकमात्र दो प्रतिनिधि हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सभी मंत्रियों ने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। केंद्र शासित प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में कानूनी तौर पर तय 10 प्रतिशत की सीमा के अनुसार, जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद में अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सभी मंत्रियों ने फेरबदल की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री को औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे सौंप दिए थे।

नियमों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत तक हो सकती है। जम्मू कश्मीर विधानसभा में 90 सदस्य हैं। नेकां प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल में बहुत अच्छा बदलाव हुआ है।

वे (मंत्री) काम करेंगे और लोगों की कठिनाइयों एवं समस्याओं को कम करने की कोशिश करेंगे।’’ इस फेरबदल के बाद विधानसभा में छह बार से ईदगाह का प्रतिनिधित्व कर रहे नेकां विधायक मुबारक गुल के समर्थकों में तुरंत गुस्सा फूट पड़ा। कैबिनेट सूची से उनका नाम हटाए जाने के बाद समर्थकों ने ‘नवा-ए-सुबह’ स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नाराज कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ नारेबाजी की और इसे 40 साल से पार्टी की सेवा कर रहे नेता के साथ गंभीर अन्याय बताया।

शपथ ग्रहण समारोह से पहले गुल ने पत्रकारों से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘मैं उचित समय पर बात करूंगा। मैं 20 शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल हुआ हूं और हर बार मुझे बाहर रखा गया है। आप कह सकते हैं कि इस बार भी मुझे बाहर कर दिया गया है।’’ बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समारोह के तुरंत बाद पार्टी मुख्यालय पहुंचे।

उन्होंने गुल को पार्टी का नया महासचिव नियुक्त किया। गुल ने सागर की जगह ली है जो अब कैबिनेट में शामिल हो गए हैं। नेकां के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला साहब ने आज पार्टी के वरिष्ठ नेता और ईदगाह से विधायक मुबारक गुल साहब को पार्टी का नया महासचिव नामित किया है।

गुल साहब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।’’ नेकां के एक अन्य वरिष्ठ नेता अब्दुल मजीद भट लारमी ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर असंतोष जताया। हालांकि, उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। इस फैसले के बाद भावुक लारमी ने कहा, ‘‘अखिरकार हम भी इंसान हैं।

दिल को चोट पहुंचना स्वाभाविक है, इसमें कोई शक नहीं है। मैं यहां आपसे बात तो कर रहा हूं, लेकिन अंदर अंदर मेरा दिल जल रहा है।’’ उन्होंने कहा कि वह नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करते हैं।’’ पार्टी में इस विस्तार की विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कड़ी आलोचना की। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया।

शर्मा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘यह पहली बार है जब क्षेत्रीय और सांस्कृतिक असंतुलन दिख रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकारों को हर समुदाय, क्षेत्र और इलाके को साथ लेकर चलना चाहिए। आज ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया।’’ इस बीच, सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने खुद को मंत्रिमंडल से दूर रखा है। पार्टी अपने इस रुख पर कायम है कि जब तक जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, तब तक वह मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होगी।

नए मंत्रियों में शामिल सागर सात बार से विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 1983 में पहली बार श्रीनगर की बटमालू सीट से जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 1987 में भी यह सीट बरकरार रखी।

बाद में सागर ने खानयार सीट से चुनाव लड़ा और 1996 में वहां से जीत हासिल की। नेकां के महासचिव सागर अब तक विधानसभा का कोई चुनाव नहीं हारे हैं। सागर ने 2024 में खानयार सीट से चुनाव जीता था।

उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले श्रीनगर के पूर्व उपमहापौर शेख इमरान को 9,912 मतों के अंतर से हराया था। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके मीर ने परिसीमन के बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की थी। पहलगाम के विधायक वानी और हब्बाकदल की विधायक फिरदौस ने पहली बार मंत्री के रूप में शपथ ली।

वानी पहलगाम का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि फिरदौस 2024 में तीसरी बार हब्बाकदल निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गईं। पार्टी की महिला शाखा की अध्यक्ष फिरदौस, सकीना इट्टू के बाद अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में शामिल दूसरी महिला हैं। सागर ने उर्दू में शपथ ली, जबकि सैफुल्ला, फिरदौस और वानी ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की।

उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में पहले छह मंत्री थे।

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