ओडिशा: शक्ति शिखर सम्मेलन में बोलीं प्रभाती परिडा, मजबूत संस्थानों से ही संभव है महिला सुरक्षा

भुवनेश्वर में आयोजित तीन दिवसीय शक्ति शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ओडिशा की उप मुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने भी जमीनी स्तर पर संस्थागत तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित की।
भुवनेश्वर, एक सितंबर ओडिशा की उप मुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने मंगलवार को कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी क्रियान्वयन और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लक्ष्यों को साथ-साथ हासिल किया जाना चाहिए। परिडा ने यहां शक्ति शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “महिलाओं की सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। इन्हें मजबूत संस्थानों, प्रभावी क्रियान्वयन और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।” परिडा ने तीन दिवसीय शक्ति शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसमें 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि शक्ति शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, आपसी समन्वय को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है कि हर महिला सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरा जीवन जी सके। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शिखर सम्मेलन के उद्देश्य और दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने देशभर में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सामूहिक प्रयासों और मजबूत संस्थागत तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “किसी नीति की सफलता उसके बनाए जाने में नहीं, बल्कि उस नीति के माध्यम से लोगों के जीवन में बदलाव लाने में होती है। इसलिए केंद्र की नीतियों, राज्य की प्राथमिकताओं, जिले की व्यवस्था और समाज की भागीदारी—इन सभी को एक सूत्र में पिरोना होगा।” राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से ओडिशा सरकार के सहयोग से आयोजित इस शिखर सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया गया है, ताकि वे प्रभावी तौर-तरीकों को साझा कर सकें, योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान कर सकें और महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण तथा सशक्तीकरण के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाने की व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार कर सकें।
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