Red Fort ब्लास्ट: भगोड़े Doctor समेत 3 आतंकियों पर NIA की चार्जशीट, सामने आया बड़ा कनेक्शन

मामले RC-21/2025/NIA/DLI में अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में NIA ने जम्मू-कश्मीर के ज़मीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और मुज़फ़र अहमद (उर्फ़ फ़राज़ उर्फ़ ज़फ़र) को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही इस मामले में चार्जशीट किए गए लोगों की कुल संख्या 13 हो गई है, जिनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जिनकी अब मौत हो चुकी है) भी शामिल हैं।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार को नवंबर 2025 में राजधानी में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले में तीन और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी। मामले RC-21/2025/NIA/DLI में अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में NIA ने जम्मू-कश्मीर के ज़मीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और मुज़फ़र अहमद (उर्फ़ फ़राज़ उर्फ़ ज़फ़र) को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही इस मामले में चार्जशीट किए गए लोगों की कुल संख्या 13 हो गई है, जिनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जिनकी अब मौत हो चुकी है) भी शामिल हैं।
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फरार आरोपी मुज़फ़र की पहचान डॉ. अदील अहमद के बड़े भाई के तौर पर हुई
फरार आरोपी मुज़फ़र अहमद, जो एक पीडियाट्रिशियन (MBBS, MD) है, की पहचान सह-आरोपी डॉ. अदील अहमद राथर के बड़े भाई और "AGuH इंटरिम" (अल-कायदा से जुड़ी एक शाखा) के संस्थापक सदस्य के तौर पर हुई है। NIA की जांच से पता चला है कि मुज़फ़र उन मुख्य साज़िशकर्ताओं में से एक था - जिसमें सह-आरोपी उमर, मुज़म्मिल, अदील और मुफ़्ती इरफ़ान भी शामिल थे - जिनकी साज़िश के कारण 10 नवंबर 2025 को घातक VBIED (गाड़ी में छिपाकर रखे गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) धमाका हुआ था।
मुज़फ़र जून 2022 में श्रीनगर में ईदगाह में हुई गुप्त बैठक में शामिल हुआ था: NIA
NIA की जांच में यह भी पता चला है कि AGuH इंटरिम के संस्थापक सदस्यों में से एक, मुज़फ़र जून 2022 में श्रीनगर में ईदगाह में हुई गुप्त बैठक में शामिल हुआ था, जिसके दौरान आतंकी मॉड्यूल AGuH इंटरिम बनाया गया था। मुज़फ़र, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उमर और मुज़म्मिल द्वारा चलाई जा रही एक गुप्त IED बनाने की जगह पर TATP-आधारित IED बनाने, उनकी टेस्टिंग और उन्हें सुरक्षित रखने के काम में गहराई से शामिल था।
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मुज़फ़र के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी
मुज़फ़र के ख़िलाफ़ भी एक ग़ैर-ज़मानती वारंट (NBW) जारी किया गया है और उसे ढूँढने और गिरफ़्तार करने की कोशिशें चल रही हैं। NIA की जाँच के अनुसार, AGuH के एक ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) ज़मीर का हैंडलर्स से लगातार संपर्क था और वह इस टेरर मॉड्यूल के लिए हथियार, गोला-बारूद और कैश पहुँचाने का काम करता था। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पूर्व OGW तुफ़ैल ने इस मॉड्यूल के लिए हथियार सप्लायर का काम किया। उसने एक हैंडलर के ज़रिए 'डेड ड्रॉप' (गुप्त रूप से सामान छोड़ने की जगह) से एक AK-47, एक क्रिंकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगज़ीन और ज़िंदा कारतूस हासिल किए थे और उन्हें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जो अब मर चुका है) को 3 लाख रुपये में पहुँचाया था। नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में NIA की स्पेशल कोर्ट में दायर चार्जशीट में गिरफ़्तार आरोपियों ज़मीर और तुफ़ैल पर UA(P) एक्ट की धाराओं 13, 18, 20, 23, 38 और 39, और BNS की धाराओं 61(2), 147, 148 और 152 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
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