Modi और Shah की चुनावी रणनीति गजब की होती है, इनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत हैः Shashi Tharoor

Shashi Tharoor
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शशि थरूर ने यह भी स्वीकार किया कि अन्य दलों विशेषकर कांग्रेस, को इस प्रकार की रणनीति और संगठन से सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्ता में आने के बाद इन नेताओं का संदेश देश को जोड़ने वाला होगा, न कि विभाजन करने वाला।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति और संगठन क्षमता की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा है कि इन नेताओं ने पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में प्रभावी प्रदर्शन किया है, जो उनकी मजबूत संगठन शक्ति और चुनाव संचालन की दक्षता को दर्शाता है। थरूर ने कहा कि इन दोनों नेताओं की कार्यशैली पेशेवर है और वह चुनाव अभियान में संसाधनों का व्यापक उपयोग करते हैं।

थरूर ने यह भी स्वीकार किया कि अन्य दलों विशेषकर कांग्रेस, को इस प्रकार की रणनीति और संगठन से सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्ता में आने के बाद इन नेताओं का संदेश देश को जोड़ने वाला होगा, न कि विभाजन करने वाला। इसके साथ ही थरूर ने कांग्रेस की स्थिति पर भी स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने केरल में कांग्रेस की जीत की सराहना करते हुए कहा कि यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि पार्टी सही रणनीति अपनाए तो अन्य राज्यों में भी सफलता प्राप्त कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को अब गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी पहले भी इस आवश्यकता को स्वीकार कर चुकी है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे व्यवहार में उतारा जाए।

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थरूर ने कहा कि केरल में जो रणनीति सफल रही, उसका विश्लेषण कर उसे अन्य राज्यों में लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल चुनावी परिणामों पर प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर ठोस बदलाव करने होंगे। उनका मानना है कि कांग्रेस को अपनी कार्यप्रणाली, संसाधन प्रबंधन और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आए चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने दोहराया कि पार्टी के सामने चुनौती स्पष्ट है और उससे निपटने के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस केरल जैसी सफलता को दोहरा पाती है, तो वह राष्ट्रीय स्तर पर फिर से मजबूत स्थिति हासिल कर सकती है। देखा जाए तो थरूर का बयान एक तरफ राजनीतिक प्रतिस्पर्धियों की क्षमता को स्वीकार करने का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर अपनी ही पार्टी के लिए सुधार और पुनर्गठन का स्पष्ट संदेश भी देता है।

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