Kerala PSC भर्ती अनियमितताओं पर अगले हफ्ते होगी सख्त कार्रवाई, Ramesh Chennithala का बयान

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कोझिकोड में कहा कि लोक सेवा आयोग भर्ती की अपराध शाखा जांच सही दिशा में चल रही है और दोषियों के खिलाफ जल्द कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा। उधर पूर्व राज्यपाल द्वारा पीएससी अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश पर माकपा और सरकार ने सवाल उठाए हैं।
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने रविवार को कहा कि लोक सेवा आयोग (पीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की अपराध शाखा की जांच अच्छी तरह आगे बढ़ रही है और अगले सप्ताह कड़ी कार्रवाई की जाएगी। केरलम के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल के दौरान आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं और की गई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर पीएससी अध्यक्ष एम आर बैजू को पद से हटाने की सिफारिश की थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और राजस्व मंत्री ए पी अनिल कुमार ने इस सिफारिश की आलोचना की।
सिफारिश के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में चेन्निथला ने कहा कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के मामले में सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘अपराध शाखा की जांच अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। हमने अदालत की टिप्पणियों की भावना को ध्यान में रखा है।
लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की पहचान की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। सरकार की ओर से इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अदालत में बार-बार याचिकाएं दायर किए जाने सहित विभिन्न कारणों से देरी हुई है।
पूर्व राज्यपाल की सिफारिश पर चेन्निथला ने कहा कि मामले की जांच किए बिना वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सूचित किए बिना ही राष्ट्रपति को पत्र भेजा गया था। चेन्निथला ने कहा, ‘‘ आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं और की गई नियुक्तियों से जुड़ी इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने से पिछले 10 वर्षों में पीएससी के कामकाज को लेकर स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है।
ये शिकायतें गंभीर हैं और इन्हें ऐसे ही खारिज नहीं किया जा सकता।’’ अनिल कुमार ने कहा कि वह आरोपों का सामना कर रहे पीएससी अध्यक्ष और उसके सदस्यों का बचाव नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार को सूचित किए बिना अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश करने के लिए पूर्व राज्यपाल आर्लेकर की आलोचना की। अनिल कुमार ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति को सिफारिश भेजना गंभीर चिंता का विषय है, खासकर इसलिए कि आर्लेकर ने केरल के राज्यपाल का पद छोड़ने से कुछ समय पहले और जांच रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले यह सिफारिश की थी।
माकपा की राज्य इकाई के सचिव एम वी गोविंदन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि वह केरलम पीएससी की स्वतंत्रता को कमजोर करने के लिए राज्यपाल के कार्यालय का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि पीएससी अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की सिफारिश असंवैधानिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। गोविंदन ने संविधान के अनुच्छेद 316 और 317 का हवाला देते हुए कहा कि पीएससी के सदस्यों की नियुक्ति छह वर्ष के कार्यकाल के लिए की जाती है और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया में कदाचार के आरोपों की उच्चतम न्यायालय से जांच कराना शामिल है।
उन्होंने दावा किया कि केरलम लोक सेवा आयोग (पीएससी) के सदस्यों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कोई मामला लंबित नहीं है और शीर्ष अदालत ने आयोग के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी भी नहीं की है। इससे पहले दिन में राज्य के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार पीएससी में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करेगी और जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय के कटघरे में लाएगी। सिद्दीकी ने कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है और अपराध शाखा से पीएससी के कामकाज की जांच कराने का आदेश दिया है।
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