Adi Shankaracharya की परिक्रमा राष्ट्रीय एकता की मिसाल, बोले Kerala Governor Om Prakash Mathur

केरलम पिरवी समारोह के दौरान राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने आदि शंकराचार्य के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य द्वारा चारों कोनों में स्थापित किए गए चार मठ देश को एक सूत्र में बांधने वाले स्थायी प्रतीक हैं।
तिरुवनंतपुरम, एक नवंबर केरलम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने रविवार को कहा कि आदि शंकराचार्य की ‘भारत परिक्रमा’ राष्ट्रीय एकता का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यहां लोक भवन में आयोजित ‘केरलम पिरवी’ (राज्य स्थापना दिवस) समारोह में माथुर ने कहा कि आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली केरलम आज भी राष्ट्रीय एकता के आदर्शों को बनाए हुए है। लोक भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राज्यपाल ने कहा, “केरलम में जन्मे शंकराचार्य ने उस दौर में पैदल यात्रा करते हुए देश के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की।
ये मठ उस एकता के स्थायी प्रतीक हैं, जो भारत को एक सूत्र में बांधती है।” उन्होंने कहा कि उत्तर भारत और दूर-दराज के अन्य क्षेत्रों के लोग केरलम और उसकी समृद्ध परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं तथा यह दक्षिणी राज्य देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने में हमेशा सबसे आगे रहा है। माथुर ने केरलम की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की विशिष्ट धरोहर और आतिथ्य-भाव ने भारत की विविध संस्कृतियों और परंपराओं को एक साथ लाकर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि केरलम ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान भी राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी।
माथुर ने सभी से राज्य की प्रगति और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए मिलकर काम करने तथा आदि शंकराचार्य की ओर से प्रतिपादित एकता की भावना के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया। भगवान शिव का अवतार माने जाने वाले आदि शंकराचार्य को भारत के महानतम दार्शनिकों में से एक माना जाता है। उन्होंने ‘अद्वैत’ दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार परमात्मा (परम सत्ता) और जीवात्मा (व्यक्तिगत आत्मा) एक ही हैं और यह भौतिक संसार ‘माया’ या भ्रम है।
उनका दर्शन आज भी अद्वितीय और प्रासंगिक है।
अन्य न्यूज़













