CEC Gyanesh Kumar पर चले देशद्रोह का केस, इंडिया गठबंधन ने पद से हटाने की मांग की

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विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। नई दिल्ली में आयोजित प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कानून तोड़कर मतदाता सूचियों में अनधिकृत बदलाव की अनुमति दी।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने ‘‘राष्ट्रीय और राज्यों के चुनावों को चुराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा रची गई आपराधिक साजिश’’ में भाग लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुमार को आरोपी बनाने संबंधी ‘प्रस्ताव’ प्रतीकात्मक ‘‘जन महाभियोग’’ कार्यक्रम में रखा। विपक्ष ने चुनावी अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ यह कार्यक्रम आयोजित किया।

प्रस्ताव में कहा गया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों ने उसमें उल्लिखित ‘‘आरोपों’’ के आधार पर कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने का संकल्प लिया है। पहले आरोप में विपक्षी गठबंधन ने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार ने ‘‘राष्ट्रीय और राज्यों के चुनावों को चुराने के लिए भाजपा द्वारा रची गई द्वेषपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण आपराधिक साजिश’’ की निगरानी की और उसमें भाग लिया। इसमें आरोप लगाया गया कि कुमार ने ‘‘जानबूझकर कानून के शासन को तोड़ा और उन्हें मतदाता सूचियों तक पहुंच बनाने, मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाने एवं जोड़ने तथा चुनाव परिणामों में हेरफेर करने की अनुमति दी।’’ प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘वह चुनावी प्रक्रिया पर पहले से सुनियोजित हमले को अमल में लाने के दोषी हैं, जबकि यही प्रक्रिया भारत के लोकतंत्र की बुनियाद है।

यह एक आपराधिक कृत्य और राष्ट्र तथा भारत के संविधान के खिलाफ देशद्रोह का कृत्य है।’’ लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय उपाध्यक्ष की भूमिका में थे। खरगे के अलावा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश तथा के. सी. वेणुगोपाल समेत अन्य नेता ‘‘जन महाभियोग’’ कार्यक्रम में मौजूद थे। यह कार्यक्रम यहां विपक्ष की रैली से एक दिन पहले आयोजित किया गया।

इसके अलावा विपक्षी गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के कई सांसद और नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इनमें सपा सांसद धर्मेंद्र यादव और तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता डेरेक ओब्रायन शामिल थे। भाजपा ने विपक्ष पर मतदाताओं का विश्वास जीतने में विफल रहने के बाद अराजकता का सहारा लेने और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने का आरोप लगाया है।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने शनिवार को पारित प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर मतदाता सूचियों के ‘‘हेरफेर वाले, अधूरे और विनाशकारी’’ एसआईआर के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होने का आरोप भी लगाया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया, ‘‘उन्होंने 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाना सुनिश्चित किया और उन्हें भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के मौलिक अधिकार से ऐसे तरीके से वंचित किया, जो पक्षपातपूर्ण, अपारदर्शी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।’’ इसमें कहा गया कि यह एक आपराधिक कृत्य और राष्ट्र तथा भारत के संविधान के खिलाफ देशद्रोह का कृत्य है। विपक्षी गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर संसद की निगरानी या जानकारी के बिना निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के फॉर्म-6 में ‘‘गैरकानूनी तरीके से’’ संशोधन करने का भी आरोप लगाया।

प्रस्ताव में इसे ‘‘पहली बार मतदाता बनने वालों के पंजीकरण को रोकने और उनसे संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान का मौलिक अधिकार छीनने की आपराधिक साजिश’’ करार देते हुए कहा गया कि इससे भारतीय नागरिक के रूप में उनके अधिकार निष्प्रभावी हो जाते हैं। विपक्षी गठबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि कुमार ने मतदाताओं के नाम हटाने और स्थानीय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को वैध मतदाताओं के नाम जोड़ने से रोकने के उद्देश्य से ईआरओनेट/ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर का ‘‘दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल’’ करके मतदाता सूचियों पर नियंत्रण को निर्वाचन आयोग में ‘‘गैरकानूनी तरीके से केंद्रीकृत’’ किया। इसमें कहा गया, ‘‘यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की उस प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का आपराधिक प्रयास है, जिस पर भारत का लोकतांत्रिक ढांचा टिका है।’’ विपक्षी गठबंधन ने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने निर्वाचन आयोग में सात सहयोगियों के साथ मिलकर जानबूझकर कानून का उल्लंघन किया और अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से ‘‘जानबूझकर और गैरकानूनी तरीके से बाहर रखा’’, जिसके कारण उन्हें कम से कम 14 आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज करानी पड़ीं।

प्रस्ताव के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने तथा भारत के संविधान को कायम रखने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करने के अपने संवैधानिक दायित्व का ‘‘उल्लंघन’’ किया है। विपक्षी गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर विपक्ष को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं देने का भी आरोप लगाया। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति इस शर्मनाक अनुपालन के बदले ज्ञानेश कुमार के परिवार के कई सदस्यों को लाभ और सुविधाएं मिली हैं, जिनमें महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां और पारिश्रमिक के अभूतपूर्व अवसर शामिल हैं।’’ इसमें आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर अपने ‘‘संवैधानिक दायित्व के विरुद्ध खुलेआम काम करके’’ ज्ञानेश कुमार ने भारत के लोगों के भरोसे और विश्वास को तोड़ा है।

प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘उन्होंने जानबूझकर कानून के शासन को कमजोर किया और लोकतांत्रिक तरीके से कराए गए चुनावों के परिणामों में हेरफेर तथा उन्हें गलत साबित करने की आपराधिक साजिश में भाग लिया। ये चुनाव भारत के लोकतंत्र की आधारशिला हैं।’’ विपक्षी गठबंधन ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार को प्रदान किया गया आजीवन कानूनी संरक्षण राष्ट्र और भारत के संविधान के खिलाफ उनके द्वारा की गई आपराधिक गतिविधियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से था और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘भारत की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘इंडिया’ (जनबंधन) के सांसद और 31 अक्टूबर 2026 को नयी दिल्ली में एकत्र नागरिक संकल्प लेते हैं कि भारत के लोगों के साथ इस गंभीर विश्वासघात के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारत के संविधान के कानूनी ढांचे के अनुरूप अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’ इस प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुशवाहा और कुछ अन्य सांसदों ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने के साथ उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।

‘स्वराज अभियान’ के प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं, बल्कि ‘‘मुख्य चुनाव अभियुक्त’’ हैं।

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