Akhilesh Yadav और सपा नेताओं के खिलाफ UP के तीन जिलों में लगे विवादित होर्डिंग

उत्तर प्रदेश में विधानपरिषद चुनाव मतदान के दौरान लखनऊ, सीतापुर और बलिया में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाते विवादित होर्डिंग सामने आए। बलिया समेत कई जगहों पर गुस्साए सपा कार्यकर्ताओं ने इन होर्डिंग्स को फाड़ दिया। इस पर अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए पूछा कि इन पोस्टरों को कौन लगवा रहा है और इसका वित्तपोषण कौन कर रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानपरिषद चुनाव के लिए मतदान जारी रहने के बीच शुक्रवार को लखनऊ, सीतापुर और बलिया के कई स्थानों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी के अन्य नेताओं को निशाना बनाने वाले ‘होर्डिंग’ दिखाई दिए, जिसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने उनमें से कुछ को फाड़ दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। इन होर्डिंग पर सपाइयों का क्या भरोसा का नारा लिखा था।
इनमें सपा पर माफिया तत्वों से संबंध रखने तथा राज्य में अपने शासन के दौरान सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। बलिया में शुक्रवार सुबह शहर के कई स्थानों पर होर्डिंग दिखाई दिए। गुस्साए सपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें फाड़ दिया।
एक होर्डिंग पर लिखा था, खैनी और बनारसी पान और बजट चला गया कब्रिस्तान , जबकि एक अन्य पर नारा था, दंगा, इफ्तार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी। बैनरों में यादव को लाल जालीदार टोपी और लाल गमछा पहने दिखाया गया है। समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरी ने कहा, ‘‘भाजपा के लोग निचले स्तर की राजनीति कर रहे हैं और होर्डिंग लगाकर सोच रहे थे कि माहौल को खराब करेंगे।’’ उन्होंने कहा कि वे हताशा में होर्डिंग लगाकर माहौल को बिगाड़ना चाहते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों ने जाकर होर्डिंग फाड़ दिए।’’ कोतवाली प्रभारी प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि होर्डिंग किसने लगाया, यह अभी पता नहीं चला है और पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। इसी तरह लखनऊ में, गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के पास और अन्य प्रमुख जगहों पर लगाए गए होर्डिंग में अखिलेश यादव और उनके परिवार के सदस्यों - राम गोपाल यादव, शिवपाल यादव और डिंपल यादव - को निशाना बनाया गया। कुछ बैनरों में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के साथ-साथ सपा नेता आजम खान की तस्वीरें भी थीं।
राज्य की राजधानी लखनऊ में सीतापुर राजमार्ग और कई प्रमुख चौराहों पर भी ऐसे ही बैनर देखे गए। सपा नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने मतदान के दिन मतदाताओं को प्रभावित करने और शासन से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करके एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया। लखनऊ भाजपा और सपा के बीच चल रही पोस्टर जंग के बीच ये नए पोस्टर सामने आए हैं।
इस बीच यादव ने “एक्स” पर एक पोस्ट में कहा “हमारा सवाल ये नहीं है कि ऐसे आपत्तिजनक पोस्टर लगा कौन रहा है, हमारा सवाल ये है कि ‘लगवा कौन रहा है?’’ उन्होंने कहा “वैसे इस सवाल का जवाब हमारे पास तो है ही, लेकिन हम इन पोस्टरों के पीछे के मुख्य ‘धनदाता’ का नाम सरकार से सुनना चाहते हैं।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जाती हुई सरकार क्या इतनी कमज़ोर हो गई है कि ऐसे पोस्टर सरेआम लग रहे हैं लेकिन न तो पुलिस को दिखाई दे रहे हैं न स्थानीय प्रशासन को।” सपा प्रमुख ने कहा, “भाजपा सरकार अपने प्रशासन का मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाये। वैसे जितने अधिक इस प्रकार के पोस्टर लग रहे हैं उतना ही पीडीए समाज एकजुट हो रहा है।” उन्होंने कहा, “हो सके तो उप्र के हर मुख्य चौराहों पर ऐसे पोस्टर अधिक से अधिक लगवाएं। आपका स्वागत है।
अग्रिम धन्यवाद।” यादव ने यह नारा दिया “पीडीए समाज के मान को पहुंचेगी जितनी ठेस! उतना ही पीडीए समाज होगा संगठित और एक।” 18 अक्टूबर को दशहरा से पहले, लखनऊ में कई जगहों पर ऐसे होर्डिंग लगाए गए, जिनमें यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, अमेरिकी उद्यमी एलन मस्क और अन्य लोगों को रावण के 10 सिरों के रूप में दिखाया गया था। सनातन रक्षा संगठन द्वारा लगाए गए इन बैनरों में उन्हें सनातन भारत का दुश्मन बताया गया था।
बाद में सपा कार्यकर्ताओं ने इन्हें हटा दिया। इससे पहले, लखनऊ में कई जगहों पर यादव और अन्य सपा नेताओं को कटियाबाज़ (बिजली चोर) बताते हुए पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सपा शासन के दौरान बिजली की आपूर्ति में भेदभाव किया जाता था। सपा ने भाजपा सरकार पर इस अभियान को प्रायोजित करने का आरोप लगाया था।
ये पोस्टर ऐसे समय में सामने आए हैं, जब शुक्रवार को विधान परिषद के 11 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान हो रहा है।
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