Vikram Misri बोले, Covid-19 का दोष मढ़े जाने के डर से सख्त हुआ था China का रुख

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विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मुंबई में आयोजित एक कॉन्क्लेव में कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान खुद को कलंकित किए जाने की आशंका से चीन ने बाहरी दुनिया के प्रति बेहद कड़ा रुख अपना लिया था। उन्होंने चीन में भारत के राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल और गलवान घाटी झड़प के समय की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। मिसरी ने स्पष्ट किया कि भारत ने इस महामारी को लेकर कभी भी बीजिंग पर उंगली नहीं उठाई थी।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शनिवार को कहा कि चीन को लगता था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे कोविड-19 महामारी के लिए दोषी ठहरा रहा है और कलंकित कर रहा है, इसी धारणा के कारण बाहरी दुनिया के प्रति उसका रवैया कठोर हो गया तथा उसने अपनी सीमाओं के भीतर सख्त प्रतिबंध लागू किए। मिसरी ने कश्मीरी पंडितों के एक संगठन की ओर से आयोजित ‘इक्वात ग्लोबल बिजनेस कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए चीन में भारत के राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आई प्रमुख चुनौतियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच अभूतपूर्व झड़प हुई थी।

उन्होंने कहा कि करीब 50 वर्षों में पहली बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों पक्षों को जनहानि हुई थी। मिसरी ने कहा कि इस स्थिति को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाने वाली बात यह थी कि यह घटना कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान हुई थी। इसके कारण संवाद करने, चीन की आंतरिक धारणाओं को समझने और दिल्ली आने-जाने पर कड़ी पाबंदियां थीं।

विदेश सचिव ने कहा, “उस दौरान यात्रा करना बेहद कठिन था। कोविड के समय जब भी आप चीन से बाहर जाते थे, तो लौटने पर अनिवार्य रूप से 21 दिन पृथकवास में रहना पड़ता था। दिल्ली की एक दिन की यात्रा के बाद भी 21 दिन का ‘वनवास’ झेलना पड़ता था।” मिसरी ने कहा, “कोविड ने बहुपक्षीय, अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय स्तर पर पहले ही काफी तनाव पैदा कर रखा था, क्योंकि चीनियों को लग रहा था कि उन्हें कलंकित किया जा रहा है और महामारी के लिए दोषी ठहराया जा रहा है।” मिसरी के अनुसार, भारत ने महामारी के लिए कभी चीन पर उंगली नहीं उठाई।

हालांकि, चीन को लग रहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे कठघरे में खड़ा करने पर आमादा है। उन्होंने कहा, “इसलिए कुछ समय तक समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उनकी प्रतिक्रिया और रवैया काफी कठोर रहा।” उन्होंने कहा कि यही वजह थी कि चीन ने अपने नागरिकों पर लंबे समय तक सख्त प्रतिबंध लागू रखे। विदेश सचिव ने अपनी कश्मीरी पंडित जड़ों के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, “कश्मीरी डीएनए, कश्मीरियत और वे सभी चीजें, जो आपके भीतर रची-बसी हैं तथा जिन्हें आप सीखते और अपनाते हैं, मेरी जीवन-यात्रा का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।”

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