त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग पर बढ़ सकती है साइबर धोखाधड़ी, Arctic Wolf ने दी चेतावनी

साइबर सुरक्षा कंपनी आर्कटिक वुल्फ के भारत इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष देवेंद्र रथ ने आगाह किया है कि त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन से वित्तीय धोखाधड़ी में तेजी आ सकती है। साइबर अपराधी फर्जी कूरियर संदेशों, छूट के प्रलोभन और संदिग्ध एपीके फाइलों के जरिए व्यक्तिगत डेटा चुराने की कोशिश कर रहे हैं।
साइबर सुरक्षा कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने आगाह करते हुए कहा है कि त्योहारी मौसम में खरीदारी की आपाधापी साइबर अपराधियों के लिए अनुकूल माहौल बनाती है तथा इस दौरान ऑनलाइन क्रय और यात्रा में वृद्धि के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल लेन-देन, यात्रा बुकिंग और सामान पहुंचाये जाने की घटनाएं बढ़ने के कारण अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी और पहचान से जुड़े हमलों में तेजी आ जाती है। साइबर सुरक्षा कंपनी ‘आर्कटिक वुल्फ’ में भारत इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष देवेंद्र रथ ने कहा, ‘‘त्योहारी मौसम व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए बड़े अवसर तो लाता है, लेकिन साथ ही यह साइबर अपराधियों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार कर देता है।
इस त्योहारी मौसम में लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां जुटाना और सोशल इंजीनियरिंग अभियानों में तेजी आने की आशंका है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कंपनियों के मामले में, हमलावर अक्सर मौसमी प्रलोभनों का फायदा उठाते हैं, जैसे कि खरीदारी पर छूट, कूरियर और सामान आपूर्ति संदेश, लॉयल्टी रिवॉर्ड, इनवॉइस से जुड़ी धोखाधड़ी, बैंकिंग अलर्ट, टैक्स से जुड़े संदेश और खाता सत्यापन के अनुरोध।’’ आर्कटिक वुल्फ के जोखिम संबंधी अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि सबसे सफल हमलों में से कुछ, तकनीकी जटिलता के बजाय भरोसे, जल्दबाजी और परिचित होने की भावना का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि हमलावर अब बड़ी घटनाओं, वित्तीय समय-सीमाओं और अत्यधिक सक्रियता वाले दौर को ध्यान में रखकर अपने हमलों की योजना बना रहे हैं। रथ ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि उपभोक्ताओं पर एसएमएस, व्हाट्सऐप, ईमेल और सोशल मीडिया जैसे भरोसेमंद माध्यमों के जरिए हमले किए जाएंगे।’ ‘आर्कटिक वुल्फ’ के जोखिम अध्ययन दल के हालिया अनुसंधान से पता चला है कि हमलावर किस तरह भरोसेमंद ‘मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (संदेशवाहक मंचों)’ और प्रमाणित व्हाट्सएप सत्र का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
कंपनी के अनुसंधानकर्ता दल के मुताबिक साइबर हमलावर वास्तविक रिश्तों का फायदा उठाकर हानिकारक सामग्री प्रसारित करते हैं, जिससे उनके फर्जी संदेश बिल्कुल असली लगने लगते हैं और लोगों के उनसे जुड़ने (या उन पर प्रतिक्रिया देने) की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस दल का कहना है कि त्योहारी मौसम के दौरान, आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर मौजूद खतरनाक एंड्रॉइड एप्लिकेशन (एपीके) की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। साइबर अपराधी अक्सर कूरियर डिलीवरी, केवाईसी अद्यतन, बिजली बिल, खाता अस्थायी रूप से बंद कर दिये जाने, टैक्स नोटिस और परिवहन सेवाओं जैसे विषयों का इस्तेमाल लोगों को लुभाने के लिए करते हैं, ताकि वे उनके खतरनाक एपीके अपने मोबाइल में ‘इंस्टॉल’ कर लें।
एक बार इंस्टॉल हो जाने पर, ये उपयोगकर्ताओं की गोपनीय जानकारी चुरा सकते हैं, ‘वन-टाइम पासवर्ड’ को हासिल कर सकते हैं, संदेश पर नजर रख सकते हैं और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। ‘आर्कटिक वुल्फ’ के मुताबिक कंपनियों के लिए, कर्मचारियों की सतर्कता में थोड़ी सी भी कमी गंभीर परिणाम ला सकती है। क्रेडेंशियल (लॉगिन जानकारी) चोरी होने के अलावा, साइबर हमलों के कारण बिजनेस ईमेल से छेड़छाड़, क्लाउड मंच तक अनधिकृत पहुंच, भुगतान धोखाधड़ी, रैनसमवेयर का हमला, या कामकाज में बड़ी रुकावटें आ सकती हैं।
आर्कटिक वुल्फ के अध्ययन में सामने आया है कि हमलावर अब केवल जटिल तकनीकी तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय, पहचान प्रणालियों (आइडेंटिटी सिस्टम), भरोसेमंद संचार माध्यमों और थर्ड-पार्टी संबंधों को अधिक निशाना बना रहे हैं। उसने कहा कि त्योहारी मौसम के दौरान जोखिम कम करने के लिए, संगठनों को ईमेल, क्लाउड और ‘रिमोट एक्सेस’ वातावरण में बहुकारक प्रमाणन लागू करके अपनी पहचान सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
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