DVAC Raids: पूर्व मंत्री KN Nehru के 25 ठिकानों पर तलाशी, नौकरी घोटाले में कार्रवाई

DVAC Raids: पूर्व मंत्री KN Nehru के 25 ठिकानों पर तलाशी, नौकरी घोटाले में कार्रवाई
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तमिलनाडु में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने करोड़ों रुपये के कथित पैसे के बदले नौकरी घोटाले में पूर्व मंत्री के एन नेहरू से जुड़े 25 परिसरों की तलाशी ली। एजेंसी ने मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह कदम उठाया, जहां ईडी के दस्तावेजों के आधार पर जांच के आदेश दिए गए थे। द्रमुक विधायक नेहरू ने बताया कि अधिकारियों ने दो लैपटॉप और कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं।

तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने कई करोड़ रुपये के कथित ‘पैसे के बदले नौकरी ’ घोटाले के सिलसिले में पूर्व मंत्री एवं द्रमुक नेता के एन नेहरू से जुड़े 25 ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक नेहरू ने छापेमारी के बाद तिरुचिरापल्ली में संवाददाताओं से कहा कि छापेमारी करने वाले अधिकारियों ने उनसे व्यापक पूछताछ नहीं की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने कुछ दस्तावेजों के साथ दो लैपटॉप जब्त किए हैं।

नेहरू ने पत्रकारों से कहा, ‘‘उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। वे आए और हर जगह की तलाशी ली। उन्होंने पूरे परिसर की जांच की और जो सामान ले जाया गया, उसे लिपिबद्ध किया।’’ नेहरू ने कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी इन कार्रवाइयों का अदालत में सामना करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल के दौरान ज़मीन हड़पने के आरोपों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था।

मंत्री आर निर्मल कुमार ने चेन्नई में मीडिया को संबोधित करते हुए मामले का विस्तृत विवरण देते हुए आरोप लगाया कि लगभग 2,300 उम्मीदवारों में से प्रत्येक से 30 से 40 लाख रुपये तक की वसूली की गई। उन्होंने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में जानबूझकर तमिलनाडु लोकसेवा आयोग (टीएनपीएससी) को दरकिनार किया गया और इसके बजाय नियुक्तियों को अन्ना विश्वविद्यालय के माध्यम से संचालित किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि इन लेन-देन की पुष्टि करने वाले डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर लिए गए हैं।

मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश पर नेहरू एवं अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। ईडी ने सबसे पहले अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु पुलिस को कथित अनियमितताओं की जानकारी दी थी।

एजेंसी के अनुसार, जांच इस आरोप पर केंद्रित है कि नेहरू के मंत्री रहने के दौरान नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति (एमएडब्ल्यूएस) विभाग में सरकारी पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर व्यवस्थित तरीके से रिश्वत वसूली गई थी। डीएवीसी की कार्रवाई को द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार द्वारा रची गयी ‘बदले की राजनीति’ करार दिया। स्टालिन ने ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए ‘छापेमारी का तमाशा’ रचा है।

उन्होंने दावा किया कि बिगड़ती कानून व्यवस्था के कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग असुरक्षित हो गए हैं। स्टालिन ने सत्तारूढ़ पार्टी को ‘वाशिंग मशीन की तमिलनाडु शाखा’ करार दिया, जो भ्रष्ट लोगों को तो आत्मसात कर लेती है, लेकिन खास तौर पर केवल द्रमुक के पूर्व मंत्रियों को ही निशाना बनाती है।

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