Delhi Police ने 30 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का किया पर्दाफाश, 7 आरोपी अरेस्ट

उत्तरी दिल्ली पुलिस ने फर्जी कंपनियों के बैंक खातों के जरिए 30 करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के सात सदस्यों को पकड़ा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा से कुर्ती खरीद पर हुई 6,450 रुपये की धोखाधड़ी की पड़ताल के बाद यह पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। आरोपियों के पास से दर्जनों सिम कार्ड, पीओएस मशीनें, चेक बुक और फर्जी दस्तावेजों का जखीरा बरामद किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने 30 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेन-देन से जुड़े साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उत्तर दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निहारिका भट्ट ने सोमवार को बताया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए बैंक खाते साइबर अपराधियों को मुहैया कराते थे। उन्होंने बताया कि यह गिरोह दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा की शिकायत की जांच के दौरान सामने आया, जिससे ऑनलाइन एक कुर्ती खरीदने के दौरान 6,450 रुपये की ठगी की गई थी।
भट्ट ने कहा कि चार सितंबर को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद टीम ने लेनदेन की जांच की तो पता चला कि पैसा ग्रेटर नोएडा में एक निजी कंपनी से जुड़े एक बैंक खाते में गया है। डीसीपी ने बताया कि टीम ने लगभग 200 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों, बैंकिंग लेनदेन और अन्य सेवा प्रदाताओं से प्राप्त डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। अधिकारी ने कहा कि 16 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में समन्वित छापेमारी के दौरान छह आरोपियों आदित्य मिश्रा (23), आयुष वर्मा (22), अभिषेक पाल (23), हिमांशु राणा (29), राहुल कुमार (30) और गौरव पांडे (24) को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि उदित प्रताप सिंह भदौरिया (22) को 21 अक्टूबर को कानपुर से गिरफ्तार किया गया, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई। डीसीपी ने कहा कि पुलिस ने पाया कि कथित फर्जी कंपनियों और लोगों के नाम पर खोले गए लगभग 25 बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से हासिल रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि इन खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन दर्ज किया गया है, जबकि अब तक विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की 27 शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी पाई गई हैं।
अधिकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान, मिश्रा ने खुलासा किया कि उसने और कुछ सहयोगियों ने कंपनियां स्थापित की थीं और चालू खाते खोले थे, जिन्हें 25,000 रुपये के मासिक भुगतान पर राणा और कुमार को सौंप दिया गया था। उसने पुलिस को बताया कि बैंक खातों, बैंकिंग किट और इनसे जुड़े सिम कार्ड को पांडे के माध्यम से मैक्सवेल और सॉलिटेयर नाम के व्यक्तियों को दिया गया था, जो कथित तौर पर अमेरिकी नंबरों से बातचीत करते थे। पुलिस ने बताया कि गिरोह ने खाताधारकों की व्यवस्था की, परिसर किराए पर लिया और कंपनियां स्थापित करने तथा बैंक खाते खोलने के लिए दस्तावेज तैयार किए।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 39 पॉइंट-ऑफ-सेल मशीनें, 33 डेबिट कार्ड, 28 चेक बुक, 15 स्कैनर, दो लैपटॉप, पांच स्टैंप, आधार और पैन कार्ड, और 21 बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं।
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