फर्जी कैंप लगाकर ग्रामीणों के आधार से निकाले 3000 सिम, Delhi Police ने दो साइबर ठग दबोचे

उत्तर प्रदेश के मथुरा से पकड़े गए दो आरोपियों ने रियायती दवाओं का लालच देकर ग्रामीणों के बायोमेट्रिक और आधार विवरण जुटाए थे। इन विवरणों से जारी कराए गए सिम कार्ड डिजिटल अरेस्ट समेत 2.64 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए। आरोपियों के तार अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े होने का भी संदेह है।
दिल्ली पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के एक मामले की छानबीन के दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किया है जो गांवों में फर्जी स्वास्थ्य शिविर लगाकर रियायती दरों पर दवाइयां देने के बहाने ग्रामीणों के आधार और बायोमेट्रिक विवरण हासिल करते थे और कथित रूप से उनके जरिए सिम कार्ड जारी कराकर आगे साइबर अपराधियों को बेच देते थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने इस तरह एक साल में कथित तौर पर तीन हजार से अधिक सिम चालू कराए और उनका संबंध 2.64 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायतों से मिला है।
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने 20 और 21 अक्टूबर की दरमियानी रात उत्तर प्रदेश के मथुरा में छापेमारी कर जितेंद्र सिंह (29) और ब्रजेश कुमार (21) को गिरफ्तार किया। आईएफएसओ में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव त्यागी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी ‘डिजिटल अरेस्ट’ से संबंधित मामले में की गई है। उनके मुताबिक, आरोपियों ने शिकायतकर्ता को कथित तौर पर वीडियो कॉल पर कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर लगभग दो सप्ताह के दौरान 1.64 करोड़ रुपये ठगे थे।
अधिकारी ने कहा कि मोबाइल नंबरों और उपकरण से जुड़े आंकड़ों के तकनीकी विश्लेषण से जांचकर्ता वृंदावन-मथुरा क्षेत्र तक पहुंचे, जहां कथित ई-सिम आपूर्ति नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपियों ने गांवों में फर्जी स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए, जिनमें ग्रामीणों के आधार और बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने के लिए रियायती दरों पर दवाओं की पेशकश की गई और इस विवरण का इस्तेमाल कथित तौर पर सिम या ई-सिम कार्ड प्राप्त करने के लिए किया गया। अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपियों द्वारा कथित तौर पर चालू कराए गए सिम कार्ड का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 20 से अधिक शिकायतों से है, जिनमें करीब 2.64 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का संदेह है।
त्यागी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि वे लगभग एक साल से सिम कार्ड और ई-सिम खरीद रहे थे, उन्हें चालू करार रहे थे और उनकी आगे आपूर्ति कर रहे थे, तथा रोजाना लगभग 20 से 30 ई-सिम का व्यापार कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी 800 रुपये से 1,200 रुपये में एक चालू ई-सिम खरीदते थे और उन्हें लगभग 2,000 रुपये में आगे बेच देते थे। भुगतान कथित तौर पर यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किया जाता था।
डीसीपी ने बताया कि टीम को विदेश में बैठे लोगों के साथ बातचीत के प्रमाण भी मिले हैं और वह साइबर धोखाधड़ी तथा सिम-बॉक्स प्रणालियों से संभावित संबंधों की जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए बार-बार फोन बदलते थे और पुराने उपकरणों को नष्ट कर देते थे।
डीसीपी के मुताबिक पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
अन्य न्यूज़













