Jammu में 154 साल पुरानी 'दरबार मूव' परंपरा फिर शुरू, Civil Secretariat खुला

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शीतकालीन राजधानी जम्मू में सिविल सचिवालय और अन्य सरकारी कार्यालयों के साथ सोमवार से कामकाज फिर शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सचिवालय पहुंचकर सलामी ली और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से बातचीत की। वर्ष 2021 में बंद की गई इस व्यवस्था को सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए बहाल किया है।
जम्मू, दो नवंबर जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को शीतकालीन राजधानी जम्मू से कामकाज फिर शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि 154 साल पुरानी द्विवार्षिक ‘दरबार मूव’ परंपरा के तहत यहां सिविल सचिवालय और लोक भवन समेत अन्य सरकारी कार्यालय फिर से खुल गए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सिविल सचिवालय पहुंचने पर उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया और उन्होंने सलामी ली।
गर्मियों की राजधानी श्रीनगर में दो दिन पहले कामकाज बंद होने के बाद, केंद्र शासित प्रदेश सरकार का मुख्यालय माने जाने वाले सिविल सचिवालय से कामकाज सोमवार को पुन: शुरू हुआ। अब्दुल्ला ने सचिवालय के विभिन्न कार्यालयों का दौरा किया और अधिकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि कार्यालयों के दोबारा खुलने के साथ ही उस प्रशासनिक व्यवस्था की बहाली हुई है, जिसके तहत सरकार अपने कार्यालयों को जम्मू और श्रीनगर के बीच स्थानांतरित करती है।
उन्होंने बताया कि जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को प्रमुख इलाकों, खासकर सचिवालय के आसपास तैनात किया गया है। महत्वपूर्ण सड़कों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई है।
मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के कार्यालयों वाले सिविल सचिवालय में दोबारा कामकाज शुरू होने से पहले मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम कराया गया। सरकारी इमारतों और कर्मचारियों के आवासों की भी मरम्मत की गई। डोगरा शासकों ने 1872 में ‘दरबार मूव’ की शुरुआत की थी।
इसका उद्देश्य कश्मीर घाटी में कड़ाके की सर्दी के दौरान प्रशासन का मुख्यालय जम्मू स्थानांतरित करना था, ताकि प्रशासन के कामकाज पर सर्दियों की कठिन परिस्थितियों का असर न पड़े। आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही और जम्मू तथा श्रीनगर के बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं आर्थिक कड़ी बन गई। हर साल हजारों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के जम्मू आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था, खासकर सर्दियों के दौरान कारोबारियों और बाजारों को काफी बढ़ावा मिलता था।
हालांकि, उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने ई-ऑफिस व्यवस्था शुरू होने और करोड़ों रुपये का खर्च बचाने की जरूरत का हवाला देते हुए 2021 में इस परंपरा को बंद कर दिया था। इस फैसले की खासकर जम्मू के कारोबारी समुदाय ने आलोचना की थी। उसका मानना था कि प्रशासन के जम्मू आने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां होती थीं।
उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने अक्टूबर 2025 में दरबार मूव की परंपरा बहाल कर दी थी। इसके साथ ही उसने चुनावी वादे को पूरा करते हुए जम्मू और श्रीनगर के बीच दशकों पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था फिर शुरू की थी।
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