Karnataka Voter List विवाद: Congress Minister बोले- SIR पूरी तरह सही, 1 करोड़ नाम कटना जायज

कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद मतदाता सूची से करीब 99.32 लाख नाम हटाए जाने पर कांग्रेस में मतभेद उभर आए हैं। कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि केवल मृत, स्थानांतरित और फर्जी मतदाताओं के नाम कटे हैं। वहीं कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने 19 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित दिखाने पर सवाल खड़े किए।
कर्नाटक में कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के बाद एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में यह प्रक्रिया सही ढंग से पूरी की गई है। उनका यह बयान, अन्य राज्यों में SIR को लेकर कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की गई आलोचना से अलग नजर आता है। 27 अक्टूबर को जारी कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, मतदाताओं की संख्या में 99.32 लाख की कमी आई है—यानी यह 5.54 करोड़ से घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई है।
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जारकीहोली ने इस संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि सूची में डुप्लिकेट नाम थे, और कुछ मतदाता ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो कहीं और चले गए थे। SIR के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए, जारकीहोली ने कहा कि पार्टी की आपत्तियां पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में की गई कवायद को लेकर थीं। उन्होंने कहा कि हमारे विरोध और प्रशिक्षण की वजह से कर्नाटक में SIR का काम ठीक से हुआ। हमारा तर्क यह है कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह से यह कवायद की जानी चाहिए थी।
मंत्री ने मतदाता सूची से लगभग एक करोड़ नाम हटाए जाने का बचाव करते हुए कहा कि ये उन मतदाताओं के नाम थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जो कहीं और चले गए थे, या जिनका नाम एक से अधिक बार दर्ज था। उन्होंने कहा कि हां, ये वे मतदाता हैं जो कहीं और चले गए, जिनकी मृत्यु हो गई या जिनके नाम दो बार दर्ज थे। जारकीहोली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने राज्य में SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची की आलोचना की है।
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हरिप्रसाद ने कहा कि लगभग एक करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है। हमारा विरोध इसी बात को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी को मृत और दो बार दर्ज मतदाताओं के नाम हटाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने मतदाताओं को अनुपस्थित (absent) की श्रेणी में रखे जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हमारा सवाल उन मतदाताओं के बारे में है जिन्हें ‘अनुपस्थित’ (absent) के रूप में चिह्नित किया गया है। ये मतदाता कहाँ गए? इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला है। चुनाव आयोग के अनुसार, कर्नाटक में SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) के दौरान 19 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अनुपस्थित’ माना गया, जबकि 65.45 लाख मतदाताओं को ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ (permanently shifted) की श्रेणी में रखा गया।
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