Chhattisgarh Ground Water Assessment 2026: एक भी ब्लॉक नहीं बचा संकटग्रस्त

छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण प्रयासों के चलते अब कोई भी विकासखंड भूजल दोहन की संकटग्रस्त श्रेणी में नहीं है। वर्ष 2026 के ताजा आकलन के अनुसार राज्य में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर तक पहुंच गया है। सुरक्षित विकासखंडों की संख्या भी बढ़कर अब 127 हो गई है।
रायपुर, नौ सितंबर छत्तीसगढ़ में अब एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘संकटग्रस्त’ (क्रिटिकल) श्रेणी में नहीं है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
प्रदेश में अब एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में नहीं है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में प्रदेश के नौ विकासखंड संकटग्रस्त श्रेणी में थे और वर्ष 2025 तक भी पांच विकासखंड इस श्रेणी में बने हुए थे।
वर्ष 2026 के आकलन में ये सभी पांच विकासखंड संकटग्रस्त श्रेणी से बाहर आ गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस आकलन चक्र में प्रदेश के 12 विकासखंडों की भूजल श्रेणी में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि एक भी विकासखंड की स्थिति नहीं बिगड़ी है। विकासखंडवार भूजल आकलन प्रारंभ होने के बाद यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार है।
प्रदेश में सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर अब 127 हो गई है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार भूजल संसाधन आकलन-2026 को राज्य स्तरीय भूजल आकलन और प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान और उनके द्वारा प्रारंभ किए गए ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान ने प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को नयी दिशा और व्यापकता प्रदान की है। शासन के विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण का प्रयास आज एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।’’ मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के किसानों, नागरिकों और मैदानी अमले को देते हुए कहा कि यह परिणाम केवल शासन की नीतियों का नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प का परिणाम है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए जल संचय जन भागीदारी अभियान ने पूरे शासन तंत्र को एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करने का मजबूत आधार दिया।
जल संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ जब किसानों और नागरिकों की भागीदारी जुड़ी, तब उसके परिणाम भूजल स्तर में हुए इस ऐतिहासिक सुधार के रूप में सामने आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि भूजल संसाधन आकलन-2026 के अनुसार प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (बीएमसी) हो गया है, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 बीएमसी था।
उन्होंने बताया कि जल संरक्षण संरचनाओं के व्यापक निर्माण और पुनर्जीवन का सीधा प्रभाव भूजल रिचार्ज पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों और पोखरों से होने वाले भूजल रिचार्ज में 266.9 प्रतिशत तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं से होने वाले रिचार्ज में 202.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2026 के भूजल आकलन के लिए प्रदेशभर में कुल दो लाख 28 हजार 736 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं।
जल संचय जन भागीदारी तथा जल शक्ति अभियान (कैच द रेन) के अंतर्गत निर्मित और पुनर्जीवित जल संरचनाओं ने भूजल पुनर्भरण की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिकारियों ने बताया कि आकलन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदेश में भूजल दोहन में भी गिरावट आई है। वर्ष 2026 में कुल भूजल दोहन 6.21 बीएमसी दर्ज किया गया है, जबकि पिछले आकलन चक्र में यह 6.30 बीएमसी था।
उपलब्ध आकलन रिकॉर्ड में यह पहली वार्षिक गिरावट है। प्रदेश में भूजल दोहन का स्तर वर्ष 2022 में 49.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 46.37 प्रतिशत रह गया है। यह 70 प्रतिशत की सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है।
अधिकारियों ने बताया कि भूजल संसाधन आकलन में गर्मी के मौसम में धान के रकबे में आई कमी को भूजल दोहन घटाने का एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। विशेष रूप से बेमेतरा और राजनांदगांव जिलों में किसानों की सहभागिता से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। बेमेतरा जिले में गर्मी के धान का रकबा लगभग 26 हजार हेक्टेयर से घटकर पांच हजार हेक्टेयर रह गया है।
इसी प्रकार राजनांदगांव में यह रकबा 9,400 हेक्टेयर से घटकर लगभग 2,800 हेक्टेयर हो गया। दोनों जिलों में मिलाकर गर्मी के धान के रकबे में लगभग 27,600 हेक्टेयर की कमी आई है।
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