भाजपा सांसद भगीरथ चौधरी और लुंबा राम को बागवानी बोर्ड से मिली थी सब्सिडी, सरकार ने दी जानकारी

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केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी और राजस्थान के भाजपा सांसद लुंबाराम को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता मिली थी। हालांकि, भगीरथ चौधरी ने उन्हें मिली सब्सिडी की राशि संबंधित बैंक को वापस कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान योजना के दिशानिर्देशों में लोक सेवकों के लिए हितों के टकराव का कोई विशेष प्रावधान नहीं है।

नयी दिल्ली, 28 जुलाई सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी और राजस्थान के भाजपा सांसद लुंबाराम को पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता मिली थी। हालांकि, चौधरी ने सब्सिडी वापस कर दी है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत पात्र किसानों और उद्यमियों को व्यावसायिक बागवानी, संरक्षित खेती, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और शीत भंडार अवसंरचना के विकास के लिए सब्सिडी के रूप में आर्थिक मदद दी जाती है।

मंत्री ने पिछले पांच वर्षों में बोर्ड की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और उनके करीबी परिवार के सदस्यों का विवरण भी दिया। सूची के अनुसार, राजस्थान के सिरोही से भाजपा सांसद लुंबाराम को वर्ष 2025 में और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री तथा अजमेर से सांसद भगीरथ चौधरी को वर्ष 2026 में यह वित्तीय सहायता मिली। ठाकुर ने बताया, “भगीरथ चौधरी ने सूचित किया है कि उन्होंने योजना के तहत मिली सब्सिडी संबंधित बैंक को वापस कर दी है।

संबंधित बैंक को सब्सिडी राशि बागवानी बोर्ड को लौटाने का निर्देश दिया गया है।” मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड योजना दिशानिर्देशों में लोक सेवकों या उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए आवेदनों के संबंध में हितों के टकराव या खुद को प्रक्रिया से अलग करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। ठाकुर लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के सवाल का जवाब दे रहे थे। बनर्जी ने पूछा था कि क्या पिछले पांच वर्षों में किसी मौजूदा केंद्रीय मंत्री, सांसद या उनके करीबी परिवार के सदस्यों को इन योजनाओं के तहत सब्सिडी मिली है।

मंत्री ने बताया कि ये योजनाएं सभी पात्र आवेदकों के लिए उपलब्ध हैं, जिनमें व्यक्तिगत आवेदक, साझेदारी फर्म, कंपनियां, सहकारी संस्थाएं और अन्य वैध संस्थाएं शामिल हैं। इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत परियोजना की जमीन आवेदक के स्वामित्व में होनी चाहिए या कम से कम 10 साल की अवधि के लिए पट्टे पर ली गई होनी चाहिए और इसका रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए।

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