Siddaramaiah Sting Video केस में दिल्ली तक पहुंचे तार, VPN के जरिए किया गया था अपलोड

Bengaluru
ANI
अभिनय आकाश । Oct 29 2026 6:26PM

बेंगलुरु पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो को प्रथम दृष्टया मनगढ़ंत और झूठी कहानी बताया है। जांच के अनुसार, वीडियो में लगाए गए यौन शोषण के किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने रिकॉर्डिंग और इसे अपलोड करने में इस्तेमाल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं।

बेंगलुरु सिटी पुलिस ने बुधवार को कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग वीडियो की जांच में, प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि ये आरोप एक मनगढ़ंत और जानबूझकर रची गई कहानी का हिस्सा हैं। बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर कार्यालय ने एक प्रेस नोट में बताया कि सिद्धारमैया के इस कथित स्टिंग वीडियो—जिसने मीडिया और आम जनता के बीच काफी चर्चा बटोरी है। उनके बनाए जाने, रिकॉर्ड किए जाने, इसे अपने पास रखने, आगे भेजने और प्रसारित करने के हर पहलू की व्यापक जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि अब तक जुटाए गए सबूत प्रथम दृष्टया यह संकेत देते हैं कि वीडियो में दिखाए गए यौन शोषण के आरोप एक मनगढ़ंत और जानबूझकर रची गई कहानी का हिस्सा हैं। जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान और इकट्ठा किए गए सबूत, वीडियो में दिखाई गई किसी भी घटना के सच होने की पुष्टि नहीं करते हैं। 

इसे भी पढ़ें: दुबई से Lucknow Airport पहुंचे नेपाली युवक के पास मिला फर्जी भारतीय पासपोर्ट, गिरफ्तार


पुलिस ने बताया कि सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में दिखने वाले सभी लोगों की पहचान कर ली गई है और उनसे विस्तार से पूछताछ की गई है; कुछ लोगों से तो कई बार पूछताछ हुई है। उनके बयानों और अब तक जुटाए गए सबूतों से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि वीडियो में जिन लोगों का जिक्र है, उनके बारे में लगाए गए या इशारों में बताए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किए गए कथित मोबाइल फोन को खोज निकाला गया है और उसे जब्त कर लिया गया है। इसकी प्रमाणिकता, अखंडता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए इसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। गौरतलब है कि पुलिस के अनुसार, यह वीडियो कथित तौर पर 2023 में रिकॉर्ड किया गया था, जिसका संबंध 2011 की किसी घटना से बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि 2023 में हुई मूल रिकॉर्डिंग से लेकर सितंबर-अक्टूबर 2026 में इंटरनेट पर इसके वायरल होने तक, यह वीडियो किसके पास रहा, इसकी पूरी कड़ी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। 

इसे भी पढ़ें: Vanakkam Poorvottar: बच्चियों से शादी करने वालों को चुन चुनकर पकड़वा रहे Himanta Biswa Sarma, अब तक सैंकड़ों गिरफ्तार

पुलिस ने कहा, "तकनीकी जांच से पता चला है कि सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन का यह वीडियो सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान यूट्यूब और एक्स सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था। इसे गुमनाम अकाउंट्स के जरिए अपलोड किया गया, जिसमें डिजिटल पहचान छिपाने के लिए जटिल तरीकों का इस्तेमाल किया गया। जैसे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN), मास्क किए गए IP एड्रेस, वर्चुअल और स्पूफ किए गए फोन नंबर, और अन्य तकनीकें। इसके डिजिटल निशान कर्नाटक के बाहर के स्थानों से जुड़े मिले हैं।" विस्तृत तकनीकी विश्लेषण के जरिए, जांचकर्ताओं ने उस मोबाइल फोन की पहचान की और उसे खोज निकाला, जिसका इस्तेमाल यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने के लिए किया गया था। जांच के तार दिल्ली की एक ऐसी मोबाइल फोन दुकान तक पहुंचे, जो पुराने और रिफर्बिश्ड डिवाइस बेचने का काम करती है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़