BJP कार्ड धारक ही Indian Citizen? Passport विवाद के बीच Owaisi का Government पर तंज

Owaisi
ANI
अंकित सिंह । Jun 25 2026 7:15PM

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता जांच के सरकारी रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि इसका मक़सद लोगों को व्यवस्थित रूप से बाहर करना है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि 2030 में सिर्फ़ भाजपा सदस्यता कार्ड धारकों को ही भारतीय नागरिक माना जाएगा, और 1967 के पासपोर्ट एक्ट का हवाला देते हुए पुलिस सत्यापन के बाद जारी पासपोर्ट को नागरिकता का वैध प्रमाण बताया।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को नागरिकता की जांच के मामले में सरकार के रवैये की आलोचना की और कहा कि मौजूदा बयानों का मकसद व्यवस्थित रूप से लोगों को बाहर रखने का माहौल बनाना है। हैदराबाद में बोलते हुए, ओवैसी ने भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए बदलते मानदंडों पर चिंता जताई और आम नागरिकों पर इसके भविष्य के असर को लेकर सवाल उठाए। 

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एआईएमआईएम नेता ने सरकार के लंबे समय के एजेंडे पर गहरा शक जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लोगों की नागरिकता की स्थिति को मनमाने ढंग से चुनौती देने की ताकत हासिल करना चाहता है। इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की संभावना पर तीखी टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि हो सकता है कि सरकार यह कह रही हो कि 2030 में सिर्फ़ उन्हीं लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा जिनके पास BJP का मेंबरशिप कार्ड होगा।

ओवैसी ने 1967 के पासपोर्ट एक्ट का ज़िक्र करते हुए नागरिकता के सबूत के तौर पर पासपोर्ट की वैधता पर बात की। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज़ कड़ी पुलिस जांच के बाद ही जारी किया जाता है, जो यह पक्का करता है कि इसे रखने वाला व्यक्ति भारतीय नागरिक है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट सिर्फ़ भारतीय नागरिक को ही दिया जाता है। अगर आप पासपोर्ट एक्ट 1967 पढ़ेंगे, तो उसमें साफ़ लिखा है कि पासपोर्ट किसी गैर-भारतीय नागरिक को नहीं दिया जाता और यह पूरी पुलिस जांच के बाद ही दिया जाता है। फिर, अगर आप कहते हैं कि सिर्फ़ नागरिकता का सर्टिफ़िकेट ही सबूत है, तो नागरिकता का सर्टिफ़िकेट तो सिर्फ़ उन लोगों को मिलता है जिन्हें रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइज़ेशन के ज़रिए नागरिकता मिली हो।

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हैदराबाद के सांसद ने इस बात का विरोध किया कि नागरिकता का प्रमाण-पत्र ही राष्ट्रीयता का एकमात्र सबूत होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि ऐसे प्रमाण-पत्र आम तौर पर उन लोगों के लिए होते हैं जो रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइज़ेशन (स्वाभाविकीकरण) के ज़रिए नागरिकता हासिल करते हैं; उन्होंने तर्क दिया कि देश में पैदा हुई ज़्यादातर आबादी पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती। ओवैसी ने कहा कि मैं जन्म से और अपनी मर्ज़ी से भारतीय नागरिक हूँ। मेरी कई पीढ़ियाँ और मेरे परदादा भी यहीं पैदा हुए थे। मुझे लगता है कि सरकार किसी भी व्यक्ति से अचानक यह पूछने का अधिकार अपने पास रखना चाहती है कि 'क्या आप भारतीय हैं? उन्होंने अतिरिक्त दस्तावेज़ों की ज़रूरत को चुनौती देने के लिए अपनी वंशावली का ज़िक्र किया।

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