HERC के निजीकरण आदेश के खिलाफ Haryana में बड़ा आंदोलन, कई शहरों में बत्ती गुल

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल से कई जिलों में बिजली और पानी आपूर्ति ठप हो गई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारी नेताओं से बातचीत कर जल्द समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। वहीं राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील अधिकरण में कर्मचारियों का पक्ष रखने का आश्वासन दिया है।
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल चल रही है। गुरुग्राम, नूंह और फरीदाबाद सहित कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कुछ इलाकों में 24 घंटे से भी ज़्यादा समय तक बिजली गुल रही, जबकि अन्य जगहों पर पीने के पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
अनिल विज का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत चल रही है
इस बीच, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि हड़ताल खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे पंचकूला में कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ एक बैठक शुरू हो गई है। सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान निकल आएगा। राज्य के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार यूनियन के साथ बातचीत करेगी और उन्हें उम्मीद है कि यह आंदोलन कुछ ही घंटों में खत्म हो जाएगा। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। यह कदम तब उठाया गया जब राज्य के बिजली क्षेत्र के नियामक, HERC ने 19 अक्टूबर को 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को दो जिलों में बिजली आपूर्ति करने का लाइसेंस दे दिया, जबकि वहां पहले से ही सरकारी बिजली कंपनियां (डिस्कॉम) काम कर रही हैं।
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बिजली विभाग के करीब 40,000 कर्मचारी हड़ताल पर
बिजली विभाग के लगभग 40,000 कर्मचारियों ने गुरुवार को हड़ताल शुरू कर दी। इसका असर पूरे राज्य में देखने को मिला, जिसमें गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे शहर भी शामिल हैं। हड़ताल के कारण बिजली आपूर्ति, पानी की सेवाएं, औद्योगिक उत्पादन और कई जरूरी कामकाज बाधित हुए हैं। शुक्रवार को अनिल विज ने कहा कि सरकार ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया है और उन्हें उम्मीद है कि यह आंदोलन "कुछ ही घंटों" में खत्म हो जाएगा।
निजी कंपनियों को बिजली वितरण सौंपने के मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों का क्या कहना है?
बिजली कर्मचारियों के यूनियन ने चेतावनी दी है कि बिजली वितरण का काम निजी कंपनियों को सौंपने से, ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बिजली का खर्च उठाना और भी मुश्किल हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि इस समस्या का समाधान कब तक निकल सकता है, तो पंचकूला में विज ने पत्रकारों से कहा यह मुद्दा लगभग सुलझ चुका है। मैं पहले दिन से ही कर्मचारी यूनियन के नेताओं से कह रहा हूँ कि हड़ताल इस समस्या का हल नहीं है। आज भी मैंने कर्मचारी यूनियन के नेताओं से बात की है। मैंने उनसे कहा है कि वे आगे आएं और सरकार के साथ बैठकर बातचीत करें। इस बीच, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विज ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह से बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है। वे HERC के आदेश के खिलाफ 'अपिलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी' (APTEL) के सामने कर्मचारियों का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
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