Allahabad High Court का GDA को आदेश: Gulmohar Greens के अवैध टावर ढहाएं, लापरवाह अफसर सस्पेंड

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी के अवैध टावर 27 और 28 सहित अन्य अवैध मंजिलों को दो महीने में ध्वस्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, बिल्डर को 85 खरीदारों की रकम ब्याज सहित लौटानी होगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में हुए अवैध निर्माण के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को निर्देश दिया है कि वह सोसाइटी के अवैध टावर 27 और 28 को पूरी तरह से ध्वस्त कर दे। इसके अलावा, कोर्ट ने टावर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल, जिनका निर्माण अवैध तरीके से किया गया था, उन्हें भी दो महीने के भीतर गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह रकम एक महीने के भीतर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के खाते में जमा करानी होगी।
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ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च प्रमोटर से भू-राजस्व की बकाया राशि के रूप में वसूला जाएगा। पुलिस और प्रशासन को GDA को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने GDA के अधिकारियों की लापरवाही के लिए उन्हें फटकार लगाई और कहा कि उनकी लापरवाही के कारण निवासियों को परेशानी उठानी पड़ी है। कोर्ट ने GDA को निर्देश दिया है कि वह प्रत्येक याचिकाकर्ता को खर्च के तौर पर 50,000 रुपये का भुगतान करे।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि धोखाधड़ी और UP अपार्टमेंट एक्ट के उल्लंघन के आरोपों को लेकर प्रमोटर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर FIR दर्ज की जाए। इस पूरे मामले की जांच एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (एडिशनल CP) रैंक के एक अधिकारी द्वारा की जाएगी। कोर्ट ने तीसरे कंपाउंडिंग को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया। साथ ही, फायर NOC और कंप्लीशन सर्टिफिकेट न होने पर भी कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया, जिन्होंने 2018 की FIR में बिना कोई जांच किए ही बिल्डर को क्लीन चिट दे दी थी। उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। बिल्डर 85 खरीदारों को 10% ब्याज के साथ उनके पैसे वापस करेगा। कोर्ट ने कॉमन एरिया की अवैध बिक्री पर भी कड़ा रुख अपनाया है। यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने दिया है।
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