Chaitra Navratri 2026 Vrat: पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां दुर्गा हो सकती हैं नाराज

Chaitra Navratri 2026
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चैत्र नवरात्रि 2026 के व्रत में मां दुर्गा की पूजा के दौरान कुछ गलतियों से बचना चाहिए, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। पूजा में खंडित चावल, दूर्वा घास और लोहे या प्लास्टिक के पात्रों में जल चढ़ाना अशुभ माना जाता है, इससे देवी नाराज हो सकती हैं।

हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत ही खास माना जाता है। चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना के लिए विशेष पर्व माना जाता है। हर घर में नौ दिनों तर मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की विधिवत रुप से पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। अक्सर होता है कि साधक व्रत रखते समय व पूजा के दौरान कई बार अनजाने में छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं, जिससे आपके पूजा का फल कम हो सकता है। मां दुर्गा को अर्पित करने वाली वस्तुओं को लेकर सावधानी बरतनी बेहद जरुरी है। आइए आपको बताते हैं नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की पूजा करते समय कौन-सी गलती न करें।

खंडित चावल न चढ़ाएं

पूजा में भूलकर भी खंडित यानी टूटा हुआ अक्षत (चावल) को बिल्कुल भी न चढ़ाएं। मां दुर्गा को कभी भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए। खंडित अक्षत चढ़ाना पूजा में दोष माना जाता है और इसे अधूरा समर्पण माना जाता है। चावल को साफ करके और साबुत अवस्था में ही हल्दी या कुमकुम लगाकर अर्पित करें। ऐसा करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपके जीवन में सकारात्मकता बनीं रहेगी।

माता को न चढ़ाएं दूर्वा

फूलों के बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है, लेकिन हर फूल हर देवी-देवता को प्रिय नहीं होता है। जैसा कि मां दुर्गा को दूर्वा घास बिल्कुल भी पसंद नहीं होती है। दूर्वा को मुख्य रुप से भगवान गणेश को प्रिय है। माता को हमेशा लाल रंग के फूल प्रिय जैसे कि गुड़हल और गुलाब अर्पित करना शुभ होता है। 

बासी जल और अपवित्र पात्र

नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा में जल की शुद्धता सबसे जरुरी है। इसलिए कभी भी पूजा में बासी जल या कलश का पानी इस्तेमाल न करें। इसके साथ ही, मां दुर्गा को कभी भी लोहे या प्लास्टिक के पात्रों में जल या भोग न करें। तांबे, पीतल, चांदी या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें। शुद्ध जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मकता बनीं रहेगी। 

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