ईरान की गिरफ्त में US का जहाज! फिर जो हुआ, बौखलाया अमेरिका

केंद्र में है ईरान के 771 वे बेबस मरीज जो एपीडर्मोलिसिस बुलोसा ईवी यानी बटरफ्लाई बीमारी से पीड़ित हैं। यह त्वचा की एक ऐसी दर्दनाक और दुर्लभ बीमारी है जिसमें इंसान की खाल तितली के पंखों की तरह नाजुक हो जाती है और जरा से स्पर्श से शरीर पर गहरे जख्म तक बन जाते हैं।
अमेरिका के तेल टैंकर को जबत कर उसे ना सिर्फ बेच दिया बल्कि बेचने के बाद आई रकम से अमेरिका के कारण पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजा भी दे डाला। इसराइल और अमेरिका के साथ जारी जंग के माहौल के बीच तेहरान से एक आई खबर ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। ईरानी अदालत ने एक अभूतपूर्व कानूनी कदम उठाते हुए अमेरिका को उसी के हथियार से जबरदस्त मात दे दी है। दरअसल फारस की खाड़ी में जब्त किए गए अमेरिकी तेल टैंकर के पूरे कच्चे तेल को ईरान ने बेच दिया। करीब 3.6 से 3.7 करोड़ लगभग ₹300 करोड़ की वसूली की गई और यह पैसा अमेरिका से हुए नुकसान के मुआवजे के तौर पर सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में भेजा भी जा रहा है। इस पूरी कार्यवाही के केंद्र में है ईरान के 771 वे बेबस मरीज जो एपीडर्मोलिसिस बुलोसा ईवी यानी बटरफ्लाई बीमारी से पीड़ित हैं। यह त्वचा की एक ऐसी दर्दनाक और दुर्लभ बीमारी है जिसमें इंसान की खाल तितली के पंखों की तरह नाजुक हो जाती है और जरा से स्पर्श से शरीर पर गहरे जख्म तक बन जाते हैं।
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ईरानी अदालत ने अपने 100 से अधिक पन्नों के ऐतिहासिक फैसले में पाया कि वाशिंगटन द्वारा ईरान पर थोपे गए खड़े वित्तीय और बैंकिंग प्रतिबंधों के कारण स्वीडन की दवा कंपनियों ने इन मासूमों के इलाज के लिए जरूरी विशेष पट्टियां भेजना बंद कर दिया। इस वजह से बिना इलाज और दवा तड़प-तड़प कर दर्जनों मरीजों की मौत हो गई। जिससे अदालत ने अमानवीय और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया। अदालत द्वारा तेल टैंकरों को अमेरिका की संपत्ति साबित किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रियाओं के तहत तेल को नीलाम कर डाला और पूरी राशन तहरान न्यायपालिका के खाते में भी भेज दी गई। अदालत के आदेशानुसार याचिका दायर करने वाले सभी 771 बटरफ्लाई मरीजों के एनजीओ खाना एईबी को प्रति मरीज 2 अरब तोमान की राशि तुरंत ट्रांसफर करने के निर्देश भी जारी किए गए। जहां एक तरफ ईरान ने इसे अमेरिका की अवैध दादागिरी पर पीड़ितों की नैतिक और कानूनी जीत बताया। वहीं अमेरिका ने इस तेल नीलामी की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन और डकैती करार दिया है।
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ईरान की अदालत ने जो फैसला लिया है उसके पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है क्योंकि किसी दूसरे देश के टेल टैंकर को जब्त करके उस देश द्वारा थोपे गए प्रतिबंध के एवज में पीड़ितों को मुआवजा दिलाना अपने आप में एक सराहनीय कार्य के तौर पर भी देखा जा रहा है। जिससे अमेरिका की दादागिरी को बहुत बड़ी चुनौती मिल चुकी है। इस खबर के बाद से अमेरिकी सपोर्टरों को निराशा हाथ लगी है। तो वहीं रानी समर्थकों ने इसे न्याय करार दिया है। यानी वे बम बम हो चुके हैं। जिसे पूरी दुनिया देखना चाहती थी। जिसे इसराइल और अमेरिका देखना चाहते थे। लेकिन उनकी चाहत थी कि या तो वह गंभीर रूप से घायल हो या फिर अस्पताल के बिस्तर पर जिंदा लाश की तरह पड़ा हो। पर अब ईरान ने सबको चौंका दिया है।
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