तालिबान सरकार TTP के खिलाफ करे सत्यापन योग्य कार्रवाई, Pakistan ने दी चेतावनी

इस्लामाबाद ने अफगान धरती से सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने काबुल के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिनमें सुरक्षा विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ने की बात कही गई थी। सूचना मंत्रालय ने अफगान नागरिकों को हथियार मुहैया कराने या भर्ती करने के दावों को भी बेबुनियाद बताया है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से उसके क्षेत्र से कथित तौर पर सक्रिय आतंकवादियों के खिलाफ सत्यापन योग्य कार्रवाई करने का आग्रह किया। साथ ही, उसने काबुल के इस आरोप को खारिज कर दिया कि इस्लामाबाद अपनी सुरक्षा संबंधी विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ रहा है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक अलग बयान में उन आरोपों को भी खारिज किया कि वह तालिबान से लड़ने के लिए अफगान नागरिकों को हथियार मुहैया करा रहा है या पाकिस्तान विरोधी विद्रोहियों से लड़ने के लिए उनकी भर्ती कर रहा है।
अफगानिस्तान में अमेरिका के पूर्व विशेष दूत जलमय खलीलजाद ने हाल में इन दोनों गतिविधियों के संबंध में आई खबरों का जिक्र किया था। दोनों पक्षों के बीच यह बयानबाजी आतंकवादी गतिविधियों, सीमा पर बार-बार होने वाली झड़पों और अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों को लेकर बढ़े तनाव के बीच हुई है। इससे सीमा पार हिंसा के लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी विवाद और गहरा गया है।
खलीलजाद ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर लिखा था कि ऐसी खबरें आई हैं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के भीतर तालिबान से लड़ने के लिए अफगान नागरिकों को हथियार दे रहा है और पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान विरोधी विद्रोहियों से लड़ने के लिए अफगान नागरिकों की भर्ती कर रही है। हालांकि, उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया और न ही खबरों के स्रोतों की पहचान जाहिर की। पिछले महीने अफगानिस्तान ने कहा था कि उसके सुरक्षा बलों ने 28 लड़ाकों को मार गिराया और 32 अन्य को पकड़ लिया।
इनमें इस्लामिक स्टेट समूह के कथित सदस्य भी शामिल थे, जिनके बारे में कहा गया था कि वे पड़ोसी पाकिस्तान से अफगानिस्तान में दाखिल हुए थे। पाकिस्तान अक्सर काबुल पर पाकिस्तानी तालिबान, जिसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नाम से जाना जाता है, प्रतिबंधित बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और वैश्विक चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े अलकायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। टीटीपी अफगानिस्तान की सत्तारूढ़ तालिबान सरकार से अलग संगठन है, हालांकि उसके साथ उसके करीबी संबंध हैं।
अफगान तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने शुक्रवार को कहा था कि पाकिस्तान में असुरक्षा के लिए काबुल जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियां देश में सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहने पर दोष दूसरों पर मढ़ती हैं। मुजाहिद ने कहा कि काबुल की न तो पाकिस्तान को अस्थिर करने में कोई दिलचस्पी है और न ही दूसरे देशों में अशांति फैलाने या उसे वित्तीय सहायता देने की क्षमता है।
इस्लामाबाद में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर कहा कि ये दावे उन सुरक्षा संबंधी चिंताओं का जवाब नहीं देते, जिन्हें उसने दस्तावेजों से प्रमाणित बताया है। मंत्रालय ने सीमा पार घुसपैठ की कोशिशों, पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान अफगान नागरिकों और आतंकवादी संगठनों के सदस्यों की मौत तथा विदेशी मूल के हथियारों की बरामदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की जांच की जरूरत है। मंत्रालय के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 की अवधि को कवर करने वाली अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तानी तालिबान के लड़ाकों की संख्या 4,000 से 6,000 के बीच आंकी गई थी।
पाकिस्तान फिलहाल अफगानिस्तान की सीमा के निकट आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आतंकवादी हिंसा में वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकांश हमलों के लिए टीटीपी और बीएलए को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
पाकिस्तान का कहना है कि 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से टीटीपी के कई नेताओं और बीएलए के विद्रोहियों ने वहां शरण ले रखी है। हालांकि, काबुल इस आरोप से इनकार करता है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी से अब तक देशभर में आतंकवादियों के 2,800 से अधिक हमलों में 3,000 लोगों की मौत हुई है।
इनमें से ज्यादातर हमले देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और बलूचिस्तान प्रांत में हुए हैं।
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