POJK में गोलियां चलते ही कूदा भारत, हिल गई इस्लामाबाद की सत्ता!

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अभिनय आकाश । Jul 15 2026 2:31PM

रावलकोट बस स्टैंड हजारों की संख्या में लोग जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। शांतिपूर्ण तरीके से जन मार्च के लिए इकट्ठा हुए थे। उनका मकसद था मुजफराबाद पहुंचकर अपनी 38 सूत्री मांगों को सरकार के सामने रखना। लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत को शांति नहीं दमन मंजूर था। पहले आंसू गैस के घने बादलों से आसमान भर दिया गया और जब लोग पीछे नहीं हटे तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने लाइव राउंड्स यानी कि असली गोलियां दागनी शुरू कर दी।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अंत की शुरुआत हो चुकी है क्या वो इलाका जिसे पाकिस्तान ने दशकों से अपनी जागीर समझा आज उसके हाथ से फिसल रहा है। रावलकोट से मुजफराबाद तक आज सड़कों पर खून है। बारूद का धुआं है और गूंज रही है सिर्फ एक ही मांग पाकिस्तानी दमन से आजादी। मुजफराबाद की ओर बढ़ रही निहत्ते प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने सीधी गोलियां बरसाई जिसमें आठ बेगुनाह पीओजेके के नागरिकों की जान चली गई। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं था बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ एक पूर्ण विद्रोह है और इस बीच भारत ने वो कर दिखाया जिसके बाद इस्लामाबाद की सत्ता हिल गई है विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीधे शब्दों में पाकिस्तान को दुनिया के सामने अपराधी घोषित कर दिया। रावलकोट बस स्टैंड हजारों की संख्या में लोग जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। शांतिपूर्ण तरीके से जन मार्च के लिए इकट्ठा हुए थे। उनका मकसद था मुजफराबाद पहुंचकर अपनी 38 सूत्री मांगों को सरकार के सामने रखना। लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत को शांति नहीं दमन मंजूर था। पहले आंसू गैस के घने बादलों से आसमान भर दिया गया और जब लोग पीछे नहीं हटे तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने लाइव राउंड्स यानी कि असली गोलियां दागनी शुरू कर दी। 

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सुधा नोटी इलाके में भी ठीक यही बर्बरता दोहराई गई और वीडियो में साफ दिखाई दिया है कि कैसे पाकिस्तानी फौज पीओजेके के लोग जिन्हें वह अपना दुनिया में बताती है झूठ बोलती है दुश्मन की तरह निशाना बना रही है। आठ परिवारों के चिराग बुझ गए और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह गुस्सा सिर्फ एक दिन का नहीं है। इसकी शुरुआत महीनों पहले बिजली की बढ़ी हुई कीमतों और आटे की किल्लत से शुरू हुई। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी जेएसी ने जब यह आंदोलन शुरू किया तो मांगे बुनियादी थी। सस्ता गेहूं, बिजली पर सब्सिडी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का खात्मा। लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत ने बातचीत के बजाय आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल किया। नेताओं को उठाया गया। इंटरनेट बंद किया गया। अब बात रोटी से आगे निकलकर स्वाभिमान पर आ गई। सरदार अमन खान जैसे नेताओं ने सरेआम कह दिया कि पाकिस्तान इस क्षेत्र का का सिर्फ आर्थिक शोषण कर रहा है। पीओजेके के लोग अब पूछ रहे हैं कि हमारी नदियों से बिजली पैदा होती है तो हमें महंगी क्यों मिलती है? हमारा अनाज पाकिस्तान जाता है तो हम भूखे क्यों मर रहे हैं? और ठीक इस हिंसा के बाद भारत ने जो रुख अपनाया उसने पाकिस्तान की कूटनीतिक हार तय कर दी। 

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिना लाग लपेट के कहा कि पीओजेके में जो हो रहा है वो पाकिस्तान के दशकों पुराने शोषण का परिणाम है। भारत ने दुनिया को बताया कि कैसे पाकिस्तान ने इस अवैध कब्जे वाले इलाके में लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया। भारत का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये वैश्विक समुदाय को मैसेज है कि पाकिस्तान अब अपने ही कब्जे वाले इलाके को संभालने में नाकाम है। भारत ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को इन जघन्य अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराएगा और यह बयान साफ करता है कि भारत अब पीओजेके को लेकर अपने स्टैंड पर बेहद आक्रामक है। मुजफराबाद की ओर बढ़ने वाले रास्तों पर पाकिस्तान ने कंटेनर लगा दिए हैं। फौज तैनात कर दी है लेकिन प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अब पीछे हटने का रास्ता बंद हो चुका है। 15 जुलाई का मार्च निर्णायक होने वाला है। 

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