US Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, Donald Trump की इमिग्रेशन नीति खारिज, जन्म से नागरिकता का अधिकार कायम।

US Supreme Court
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Ankit Jaiswal । Jul 1 2026 10:40PM

अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने 150 साल पुरानी संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप की नीति को रद्द कर दिया है। इस ऐतिहासिक निर्णय से H-1B वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीयों सहित उन लाखों प्रवासी परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिली है, जिनके बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो गया था।

अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को लेकर चल रहा विवाद अब काफी हद तक समाप्त हो गया है। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके जरिए वह जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता की व्यवस्था को समाप्त करना चाहते थे। अदालत के इस फैसले को लाखों प्रवासी परिवारों, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा हैं।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद कई नए आदेश जारी किए थे। इनमें एक प्रमुख आदेश यह भी था कि बिना वैध दस्तावेज वाले प्रवासियों और अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं मिले। इस आदेश को कई राज्यों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने अदालत में चुनौती दी थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने छह के मुकाबले तीन मतों से ट्रंप के इस आदेश को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था पिछले लगभग 150 वर्षों से लागू हैं और इसका मूल आधार जन्मस्थान रहा है, न कि माता-पिता की इमीग्रेशन स्थिति या नागरिकता।

मुख्य न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान के चौदहवें संशोधन का उद्देश्य इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को समान अधिकार देना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय कोई नया सिद्धांत नहीं बना रहा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को ही बरकरार रख रहा हैं।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लाखों प्रवासी परिवारों पर पड़ेगा जो अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी हैं। गौरतलब है कि भारत के हजारों पेशेवर एच-1बी वीजा के तहत अमेरिका में कार्यरत हैं। यदि ट्रंप का आदेश लागू हो जाता तो उनके अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा हो सकती थीं।

भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया हैं। चिंतन पटेल, जो भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक हैं, ने इसे अमेरिका की समावेशी पहचान को मजबूत करने वाला फैसला बताया। उनके अनुसार भारतीय और दक्षिण एशियाई परिवार लंबे समय से वीजा प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह फैसला उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि ट्रंप का आदेश संविधान की भावना के खिलाफ था और इससे हजारों बच्चों के अधिकार प्रभावित हो सकते थे।

हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तथाकथित जन्म पर्यटन के मामलों पर कार्रवाई जारी रहेगी। जन्म पर्यटन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई महिला केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाकर प्रसव कराती हैं। यदि वीजा आवेदन में गलत जानकारी दी जाती है तो ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती हैं।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रह रहे थे। इनमें से लगभग 51 प्रतिशत लोग अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या अभी भी विभिन्न प्रकार के वीजा पर निवास कर रही हैं। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला भारतीय समुदाय सहित लाखों प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी कानूनी और सामाजिक राहत लेकर आया है।

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