22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चोरी, डोनाल्ड ट्रंप का देश के नाम संबोधन, अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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अभिनय आकाश । Jul 17 2026 12:21PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आज मैं ऑफिस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस, डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस, FBI और CIA से कह रहा हूँ कि वे इस बात की जाँच करें कि इतनी अहम जानकारी कैसे और क्यों छिपाई गई, इस मामले को छिपाने में शामिल लोगों को नौकरी से निकालें और अगर सही लगे तो उन पर आपराधिक आरोप लगाएँ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम अपने संबोधन में पिछले चुनावों के नतीजों पर शक जताया है। गुरुवार शाम (भारतीय समय में शुक्रवार सुबह) अपने भाषण में ट्रंप ने एक बार फिर वो बातें कही हैं, जिनका इस्तेमाल वे 2020 के चुनाव में अपनी हार को नकारने के लिए करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि 18 राज्यों के मतदाताओं का डेटा चीन द्वारा हैक या चोरी किया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आज मैं ऑफिस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस, डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस, FBI और CIA से कह रहा हूँ कि वे इस बात की जाँच करें कि इतनी अहम जानकारी कैसे और क्यों छिपाई गई, इस मामले को छिपाने में शामिल लोगों को नौकरी से निकालें और अगर सही लगे तो उन पर आपराधिक आरोप लगाएँ। लेकिन चीन की दखलअंदाज़ी को छिपाना तो बस शुरुआत थी। हम जो दस्तावेज़ों का तीसरा सेट जारी कर रहे हैं, उससे साबित होता है कि कई सालों तक हमारे चुनाव की सुरक्षा को लेकर अमेरिकियों से साफ़-साफ़ झूठ बोला गया। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हैं, और उनसे आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती है।

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हमारा मानना ​​है कि अमेरिका के विरोधी - जिनमें कम से कम रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ-साथ गैर-सरकारी समूह भी शामिल हैं - अमेरिका के चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखते हैं। दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि चुनाव से जुड़े सेंट्रलाइज़्ड डेटा स्टोर - जैसे वोटर रजिस्ट्रेशन डेटाबेस, पोलबुक और चुनाव की आधिकारिक वेबसाइटें सबसे ज़्यादा खतरे में हैं और विरोधी इन सिस्टम्स तक पहुँच बनाकर चुनाव की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। आज रात, हम जनवरी 2020 से जून 2026 तक की ये सभी जानकारियाँ जारी कर रहे हैं। यह हमारे लोकतंत्र की नींव पर किया गया एक साइबर हमला है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीनी सरकार ने चुनाव से पहले अमेरिकी जनता की राय को प्रभावित करने की कोशिश की। उनके बारे में नेगेटिव खबरें छापने के लिए अमेरिकी पत्रकारों को पैसे दिए गए। ट्रंप ने दावा किया कि चीनी सरकार चाहती थी कि वे चुनाव हार जाएं। इसके लिए उन्होंने पत्रकारों को रकम की पेशकश की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सांसदों से 'सेव एक्ट' पास करने की मांग की है। इस कानून के तहत वोटिंग पर कई तरह की पाबंदियां और शर्तें लगाई जाएंगी और वोटिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं सभी अमेरिकियों से कहता हूं कि हाउस और सीनेट में अपने प्रतिनिधियों से मांग करें कि वे बिना किसी देरी के सेव अमेरिका एक्ट पास करें।

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