Health Experts का अलर्ट: ज्यादा Screen Time बना Spine का दुश्मन, हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां

High Screen Time
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आज के डिजिटल दौर में बढ़ता स्क्रीन टाइम रीढ़ की हड्डी के लिए गंभीर खतरा बन रहा है, जिससे गलत पॉश्चर, मांसपेशियों में असंतुलन और 'टेक्स्ट नेक' जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर काम करने से स्पाइन में डिजनरेटिव बदलाव और स्लिप डिस्क का जोखिम बढ़ सकता है।

आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। हमारे रोजमर्रा की लाइफ में मोबाइल और लैपटॉप जरुरी हिस्सा बन गए हैं। वर्क, पढ़ाई और सोशल मीडिया हर काम स्क्रीन के सामने बैठकर ही होता है, लेकिन लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने की आदत हमारी स्पाइन या रीढ़ की हड्डी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर हम लगातार गलत पॉश्चर में बैठे रहेंगे, गर्दन को आगे झुकाकर मोबाइल देखना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से स्पाइन पर अधिक दबाव पड़ता है। इसको मेडिकल भाषा में टेक्स्ट नेक भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं अधिक स्क्रीन टाइम स्पाइन को किस तरह से प्रभावित कर रही है और इसके नुकसान।

 

पॉश्चर खराब हो सकता है

हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखते समय गर्दन को आगे झुका लेते हैं, तो ऐसा करने से स्पाइन पर दबाव बढ़ जाता है। सिर को 40-60 डिग्री तक झुकाने से गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द और पीठ खिंचाव महसूस होने लगता है।

मांसपेशियों का असंतुलन

लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने से शरीर की कई मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जबकि कुछ मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव आने लगता है। इस तरह का असंतुलन शरीर के प्राकृतिक ढांचे को प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप पीठ में दर्द, कंधों का आगे की ओर झुकना और गलत पॉश्चर जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

डिजनरेटिव बदलाव

स्पाइन में मौजूद डिस्क कुशन की तरह काम करती हैं, जो हड्डियों के बीच झटकों को सोखती हैं। गौरतलब है कि गलत पोजीशन और लगातार दबाव के कारण इन डिस्क में समय से पहले घिसाव (डिजनरेशन) शुरु हो सकता है। इससे स्लिप डिस्क या कमर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

नसों पर दबाव

जब रीढ़ की हड्डी की बनावट प्रभावित होने लगती है, तो इसका असर नसों पर भी पड़ सकता है और उन पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में हाथों में झनझनाहट, सुन्नता या कमजोरी महसूस हो सकती है। कई बार यह दर्द गर्दन से शुरू होकर हाथों तक या कमर से पैरों तक फैलने लगता है, जिसे अक्सर साइटिका जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है। 

बच्चों और युवाओं पर प्रभाव

आजकल ऑनलाइन क्लास और गेमिंग के कारण बच्चों में भी स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है। कम उम्र में ही यदि वे गलत पोजीशन में बैठते हैं, तो भविष्य में स्पाइन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है। 

जानें बचाव के उपाय

 - स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें, ताकि गर्दन ज्यादा न झुके।

 - ऑफिस या वर्क के दौरान हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें और स्ट्रेचिंग करें।

 - बैठते समय पीठ सीधी रखें और कुर्सी का सपोर्ट लें।

 - रोजाना योग और बैक स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करें।

 - जब आप मोबाइल का यूज करें तो आंखों की ऊंचाई तक उठाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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