Dengue Symptoms Warning: क्या डेंगू से आ सकता है Brain Stroke? जानिए डॉक्टर की राय

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डेंगू केवल प्लेटलेट्स की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गंभीर मामलों में ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार डिहाइड्रेशन, शॉक और ब्लीडिंग के कारण इस्केमिक या हेमोरेजिक स्ट्रोक जैसी दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, हर डेंगू मरीज में स्ट्रोक का खतरा नहीं होता और ज्यादातर लोग बिना किसी गंभीर स्थिति के ठीक हो जाते हैं।

बरसात के मौसम के साथ ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमरियां फैलती हैं। डेंगू होने पर व्यक्ति को बुखार, बदन दर्द और सिर दर्द के लक्षण महसूस होते हैं। इसके अलावा, प्लेटलेट्स भी तेजी से कम हो जाती है। 

जब डेंगू गंभीर हो जाता है, तो कुछ मामलों में शरीर के दूसरों अंगों को भी प्रभावित कर देता है। बता दें कि, इससे ब्रेन और नर्वस सिस्टम से संबंधित जटिलताएं दुर्लभ लेकिन गंभीर हो सकती हैं। इसमें एन्सीफ्लोपैथी, एन्सीफ्लाइटिस, दौरे पड़ना और इंट्राक्रानियल ब्लीडिंग जैसी समस्याएं शामिल हैं। 

हालांकि, कुछ मामलों में इस्केमिक स्ट्रोक या हेमोरेजिक स्ट्रोक भी रिपोर्ट हुए हैं। लेकिन यह समझना बेहद जरुरी है कि डेंगू होने का मतलब ब्रेन स्ट्रोक होना नहीं है। ज्यादातर मरीज बिना इस स्थिति के ठीक हो जाते हैं। 

क्या डेंगू से ब्रेन और नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं?

कुछ गंभीर मामलों में ब्रेन और नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि ऐसा कम मामलों में होता है। डेंगू वायरस इंफेक्शन के दौरान नर्वस सिस्टम अलग-अलग तरीकों से प्रभावित हो सकते हैं। कुछ जोखिम सीधा न्यूरोलॉजिक्ल के साथ जुड़े हो सकते हैं, बल्कि कुछ गंभीर मामलों ब्लीडिंग, शॉक, मेटाबॉलिक असमानताएं या अंग के खराब होने के कारण दिखाई दे सकती हैं।

सीडीसी के अनुसार, डेंगू के गंभीर मामलों में सबसे ज्यादा ब्लीडिंग और अंगों का काम न करना, जिसमें चेतना में भी कमी देखने को मिलती हैं, यह सभी गंभीर बीमारी के संकेत हैं। 

डेंगू और स्ट्रोक के बीच क्या संबंध है?

दरअसल, डेंगू और स्ट्रोक का संबंध मुख्य तौर पर दो तरह से समझा जाता है, जिसमें ब्रेन में ब्लीडिंग और ब्रेन की ब्लड वैसल्स में ब्लॉकेज के कारण इस्केमिक स्ट्रोक। 

एनसीबीआई के मुताबिक, डेंगू की गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकते हैं और ब्लड क्लॉटिंग सिस्टम को भी प्रभावित कर देता। वहीं गंभीर बीमारी के दौरान होने वाले अन्य बदलाव ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। जबकि डिहाइड्रेशन, शॉक और जमावट असामान्यताएं जैसे कारक भी रक्त संचार को प्रभावित करते हैं।

डेंगू में कौन से जोखिम ब्रेन से जुड़े हो सकते हैं?

प्लेटलेट्स काउंट में कमी

डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स काउंट तेजी से कम होना आम है। इससे ब्लीडिंग की संभावना बढ़ सकती हैं, लेकिन सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट कम देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि मरीज को ब्रेन ब्लीडिंग होने वाली है।

 ब्लड क्लॉटिंग में गड़बड़ी

असल में डेंगू जब गंभीर हो जाता है, तो ब्लीडिंग में ब्लड रोकने वाली प्रक्रिया प्रभावित हो सकता है। अगर ब्लीडिंग के साथ क्लॉटिंग गड़बड़ी भी मौजूद हों, तो गंभीर हेमरेज का जोखिम देखने को मिलता है। 

प्लाज्मा लिकेज और शॉक

डेंगू की गंभीर स्थिति में ब्लड वैसल्स से फ्लूइड लिकेज होने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता है और शॉक की स्थिति पैदा कर सकता है। लंबे समय तक शॉक शरीर के महत्वपूर्ण अंगो को प्रभावित कर देता है।

मेटाबॉलिक असमानताओं के अलावा, कुछ न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं में वायरस के तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव या संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका हो सकती है।

असल में डेंगू न केवल प्लेटलेट्स कम होने वाली बीमारी नहीं। बल्कि गंभीर मामलों में ब्लीडिंग, शॉक और ऑर्गन डिस्फंक्शन के साथ दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी हो सकती हैं। वहीं, ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक डेंगू में संभव हो सकता है, लेकिन यह काफी असामान्य है और हर डेंगू मरीज में इनका खतरा नहीं होता है। 

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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