Aspirants Season 3 Review | जब 'सिस्टम' का हिस्सा बनकर टकराते हैं पुराने सपने; क्या नवीन कस्तूरिया का यह सफर सफल रहा?

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रेनू तिवारी । Mar 15 2026 2:59PM

‘एस्पिरेंट्स’ के पिछले सीज़न्स की जान वह अनिश्चितता थी, जहाँ किरदार तंग कमरों में नोट्स उधार लेते और यूपीएससी (UPSC) के लिए संघर्ष करते दिखते थे। लेकिन सीज़न 3 में कहानी करवट लेती है। अब ये किरदार सिस्टम के बाहर खड़े उम्मीदवार नहीं, बल्कि सिस्टम को चलाने वाले अधिकारी हैं।

दो सफल सीज़न के बाद, TVF की Aspirants को तीसरे सीज़न के लिए रिन्यू किया गया। दीपेश सुमित्रा जगदीश के निर्देशन में, Aspirants 3 आखिरकार आ गई है। Amazon Prime Video पर स्ट्रीम हो रही इस सीरीज़ में अभिलाष शर्मा और संदीप भैया के बीच ज़बरदस्त प्रोफेशनल दुश्मनी देखने को मिलती है। क्या आप इसे देखने के लिए उत्साहित हैं? Aspirants 3 के दो एपिसोड पर आधारित हमारा पूरा रिव्यू यहाँ पढ़ें।

कहानी: जब सपना हकीकत बनकर सिस्टम से टकराता है

‘एस्पिरेंट्स’ के पिछले सीज़न्स की जान वह अनिश्चितता थी, जहाँ किरदार तंग कमरों में नोट्स उधार लेते और यूपीएससी (UPSC) के लिए संघर्ष करते दिखते थे। लेकिन सीज़न 3 में कहानी करवट लेती है। अब ये किरदार सिस्टम के बाहर खड़े उम्मीदवार नहीं, बल्कि सिस्टम को चलाने वाले अधिकारी हैं। मुख्य कहानी रामपुर के डीएम अभिलाष शर्मा (नवीन कस्तूरिया) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक 'एजुकेशनल टाउन' प्रोजेक्ट को लेकर अभिलाष और संभल के डीएम पवन कुमार (जतिन गोस्वामी) के बीच एक कड़ा पेशेवर टकराव शुरू होता है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक असहमति नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे एक गंभीर व्यक्तिगत जंग बन जाती है, जो पुरानी दोस्तियों पर भी सवालिया निशान लगा देती है।

पुरानी दोस्तियाँ, नई दुश्मनियाँ

तीसरा सीज़न अभिलाष शर्मा (नवीन कस्तूरिया) के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अब Rampur के District Magistrate (DM) के तौर पर काम कर रहे हैं। दिक्कत तब शुरू होती है, जब एक प्रस्तावित 'एजुकेशनल टाउन' प्रोजेक्ट, अभिलाष और Sambhal के DM पवन कुमार (जतिन गोस्वामी) के बीच एक पेशेवर टकराव का केंद्र बन जाता है। जो बात एक प्रशासनिक असहमति के तौर पर शुरू होती है, वह धीरे-धीरे एक गंभीर टकराव का रूप ले लेती है—जिसका असर न सिर्फ़ उनकी मौजूदा पदों पर पड़ता है, बल्कि उनके पुराने रिश्तों पर भी दिखाई देता है। कहानी एक 'नॉन-लीनियर' (आगे-पीछे चलने वाली) शैली में आगे बढ़ती है; यह उनके जीवन के पुराने पलों और मौजूदा घटनाओं के बीच घूमती रहती है, और धीरे-धीरे यह राज़ खोलती है कि उनकी दुश्मनी की शुरुआत कैसे हुई। इस तनाव के बीच, अभिलाष के पुराने दोस्तों के जाने-पहचाने चेहरे भी नज़र आते हैं—जैसे Guri (शिवंकित सिंह परिहार) और SK (अभिलाष थपलियाल)—जिनकी मौजूदगी बार-बार उस बेफ़िक्र दोस्ती की याद दिलाती है, जो कभी इस ग्रुप की पहचान हुआ करती थी। इसके साथ ही, कहानी में कुछ और भी अहम मोड़ आते हैं—जैसे शर्मा के कामकाज की जाँच होना, और Sandeep Bhaiya का यह पक्का करना कि शर्मा को अपने किए की सज़ा ज़रूर मिले। सत्ता, विशेषाधिकार और बदलते आदर्श

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यह सीज़न जिस बात की पड़ताल करने की कोशिश करता है, वह है जवानी के आदर्शों और सत्ता मिलने पर अक्सर होने वाले समझौतों के बीच की दूरी। पिछले सीज़न मेहनत और उम्मीद पर आधारित थे। यह सीज़न इस बात पर रोशनी डालता है कि जब लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो उसके बाद क्या होता है। कुछ पल इस विषय को बखूबी संभालते हैं, खासकर तब जब कहानी किरदारों को अपने फैसलों पर चुपचाप सोचने का मौका देती है। वहीं, कुछ मौकों पर कहानी को आगे बढ़ाने के लिए लेखन में बहस और टकराव पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया गया है। इसका नतीजा यह होता है कि यह सीज़न पिछले अध्यायों की तुलना में ज़्यादा नाटकीय लगता है। किरदारों की भावनात्मक सच्चाई अभी भी मौजूद है, लेकिन यह पहले की तुलना में कम ही नज़र आती है। यह सीज़न अवसरों को आकार देने में विशेषाधिकार की भूमिका की पड़ताल करने में भी समय लगाता है, जैसा कि अभिलाष और पवन के बीच की प्रतिद्वंद्विता में साफ झलकता है।

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अभिनय कहानी को मज़बूती देता है

इस सीरीज़ के सबसे मज़बूत पहलुओं में से एक इसका अभिनय है। नवीन कस्तूरिया ने अभिलाष का किरदार एक ऐसे इंसान के तौर पर निभाया है, जो उस मुकाम पर पहुँच गया है जिसका उसने कभी सपना देखा था, लेकिन अब उसे कई तरफ से सवालों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अभिनय में एक तरह का संयम झलकता है, जो किरदार की मौजूदा स्थिति के बिल्कुल अनुकूल है। जतिन गोस्वामी ने पवन कुमार के रूप में ज़बरदस्त अभिनय किया है। यह सीरीज़ यह भी दिखाती है कि जहाँ एक तरफ पवन अपने आदर्शों पर अडिग रहता है, वहीं उसमें भी कुछ कमियाँ हैं, और यही बात उसके किरदार को ज़्यादा वास्तविक बनाती है। संदीप भैया के किरदार में नज़र आने वाले सनी हिंदुजा ने एक बार फिर कहानी में अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज कराई है, भले ही उनका रोल छोटा ही क्यों न हो।

Aspirants 3 रिव्यू: क्या अच्छा है

Aspirants 3 की सबसे बड़ी ताकतों में से एक इसकी दिलचस्प कहानी और तेज़ रफ़्तार है। कहानी मुख्य टकराव को खड़ा करने में ज़रा भी समय बर्बाद नहीं करती। यह आपको तेज़ी से अभिलाष की साख और महत्वाकांक्षा की लड़ाई में खींच लेती है। इसके अलावा, मुखर्जी नगर की पुरानी यादों और आज के प्रशासनिक तनावों का मेल बहुत बढ़िया है। यह सीरीज़ को भावनात्मक गहराई के साथ-साथ कहानी में भी गति देता है। सीरीज़ के कई सीन इतने सस्पेंस और अप्रत्याशित ट्विस्ट के साथ बनाए गए हैं कि दर्शक अपनी सीटों से हिल नहीं पाते। इसके अलावा, शो का संगीत भी बहुत सुकून देने वाला है।

Aspirants 3 रिव्यू: क्या अच्छा नहीं है

इसके बावजूद, Aspirants का तीसरा सीज़न कमियों से मुक्त नहीं है। अभिलाष और दीपा का रोमांटिक ट्रैक कुछ ज़्यादा ही जल्दबाज़ी में दिखाया गया लगता है, जिससे उनके रिश्ते में पूरी तरह से डूब पाना मुश्किल हो जाता है। और जहाँ एक तरफ कहानी दिलचस्प बनी रहती है, वहीं इसका पूरा ढाँचा कुछ जाना-पहचाना सा लगता है। यह वेब शो उसी पैटर्न पर चलता है जिसे Aspirants के पुराने दर्शक आसानी से पहचान सकते हैं। यह हमेशा कुछ बिल्कुल नया पेश नहीं करता।

Aspirants 3 रिव्यू: परफॉर्मेंस

स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस की बात करें तो उन्होंने ज़बरदस्त काम किया है। नवीन कस्तूरिया, अभिलाष शर्मा के किरदार में सबसे अलग नज़र आते हैं। एक्टर अपने किरदार के विकास को पूरी शिद्दत से निभाते हैं और कहानी को एक हैरान करने वाले बदलाव के साथ आगे बढ़ाते हैं। सनी हिंदुजा, संदीप भैया के किरदार में गंभीरता और भावनात्मक संयम लाते हैं। वे कहानी के टकराव में एक मज़बूत नाटकीय ऊर्जा भर देते हैं। जहाँ तक नमिता दुबे की बात है, तो वे कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं। दूसरी ओर, अभिलाष थापलियाल और शिवांकित सिंह परिहार कहानी में गर्माहट और हास्य का पुट जोड़ते हैं, जिससे कहानी का तनावपूर्ण माहौल संतुलित हो जाता है।

Aspirants 3 रिव्यू: अंतिम फैसला

Aspirants 3 की कहानी कुछ हद तक पहले से पता चलने वाली और रोमांटिक सब-प्लॉट थोड़ा जल्दबाज़ी में निपटाया गया होने के बावजूद, यह सीरीज़ दर्शकों को बांधे रखती है। यह सीरीज़ कई मामलों में बेहतरीन साबित होती है, जिसका श्रेय इसके मुख्य टकराव, तेज़ गति और दमदार परफॉर्मेंस को जाता है। इसमें पुरानी यादों, प्रशासनिक दुनिया के बड़े दांव-पेच वाले ड्रामा, आपसी होड़ और किरदारों के विकास का एक संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है। अगर आप Aspirants के बहुत बड़े फैन रहे हैं, तो यह सीरीज़ आपके लिए ज़रूर देखने लायक है!

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