Ahoi Ashtami Vrat Vidhi: तारों को अर्घ्य देकर होगा Ahoi Ashtami Vrat का पारण, जानें पूजा विधि और महत्व

Ahoi Ashtami
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कार्तिक कृष्ण अष्टमी को संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखा जाएगा। उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 1 नवंबर को होगा, जिसका पूजा मुहूर्त शाम 05:36 से 06:54 बजे तक है। शाम 6 बजे तारों के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का पर्व संतान की अच्छी सेहत, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। इस दिन माताएं पूरा दिन निर्जला व्रत करती हैं और अहोई माता की पूजा करके संतान की उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। परंपरा के मुताबिक अहोई व्रत के दौरान अन्न और जल नहीं ग्रहण किया जाता है। शाम को तारों के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत का पारण किया जाता है। तो आइए जानते हैं अहोई अष्टमी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...

तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरूआत 01 नवंबर 2026 की दोपहर 02:51 मिनट पर हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 02 नवंबर 2026 की दोपहर 01:10 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के आधार पर अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को किया जा रहा है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम 05:36 मिनट से लेकर 06:54 मिनट तक रहेगा। वहीं आज तारों के दर्शन का समय शाम 6 बजे से हैं। चंद्रोदय का समय रात 11:40 मिनट पर है।

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और एक चौकी पर अहोई माता की तस्वीर को स्थापित करें। फिर अहोई माता के सामने दीपक जलाएं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा का पाठ करें और अहोई माता को फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा में दान की सामग्री और सुहाग से जुड़ी वस्तुएं रख सकती हैं।

इस दिन शाम को तारे देखने की परंपरा है और तारों को अर्घ्य दें। इस दौरान संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन की कामना करें। पूजा के बाद श्रद्धा के हिसाब से दान-पुण्य करें और कुछ परंपराओं में संतान के हाथों से भी दान कराया जाता है।

महत्व

इस व्रत को अहोई आठें भी कहा जाता है। यह पर्व करवा चौथ के करीब चार दिन और दीपावली से 8 दिन पहले मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत और पूजा करने से संतान दीर्घायु और सेहतमंद होता है। साथ ही संतान के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस दिन महिलाएं अहोई माता से बच्चों को रक्षा, खुशहाल जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती है।

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