Sri Lanka की ऐतिहासिक वापसी: आर्थिक कंगाली के 3 साल बाद विश्व बैंक ने दिया 'उच्च-मध्यम आय अर्थव्यवस्था' का दर्जा

विश्व बैंक ने श्रीलंका को उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा दिया है। यह फैसला उस आर्थिक संकट के तीन साल बाद आया है, जिसने देश को आर्थिक पतन के कगार पर पहुंचा दिया था।
तीन साल पहले इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक संकट और कंगाली के कगार पर पहुंचे श्रीलंका ने वैश्विक पटल पर एक अभूतपूर्व वापसी की है। विश्व बैंक (World Bank) ने बुधवार को जारी अपनी नवीनतम वैश्विक आय वर्गीकरण रिपोर्ट में श्रीलंका को 'निम्न-मध्यम आय' (Lower-Middle Income) वाले देशों की सूची से बाहर निकालकर 'उच्च-मध्यम आय' (Upper-Middle Income) वाली अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में शामिल कर लिया है। वैश्विक अर्थशास्त्र में श्रीलंका की इस सफलता को एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।
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अर्थव्यवस्था में यह वृद्धि विभिन्न उद्योगों में व्यापक सुधार तथा पर्यटन और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बढ़ोतरी के कारण संभव हुई है। विश्व बैंक ने श्रीलंका को ‘पुनरुद्धार की कहानी’ करार देते हुए कहा, ‘‘2022 में व्यापक आर्थिक संकट के कारण देश आर्थिक पतन के कगार पर पहुंच गया था। इसके केवल तीन साल बाद 2025 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण विभिन्न उद्योगों में सुधार और वित्तीय तथा पर्यटन सेवाओं में वृद्धि रही।’’
इसमें कहा गया, ‘‘यह पुनर्वर्गीकरण देश की आर्थिक मजबूती का संकेत है, हालांकि वह निर्धारित सीमा को मामूली अंतर से ही पार कर पाया है।’’ यह उपलब्धि हालिया वित्तीय संकट के बाद श्रीलंका की आर्थिक वापसी का प्रतीक मानी जा रही है। विश्व बैंक देशों को चार आय वर्गों उच्च आय, उच्च-मध्यम आय, निम्न-मध्यम आय और निम्न आय में बांटता है। यह वर्गीकरण पिछले कैलेंडर वर्ष के प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) के अनुमान के आधार पर किया जाता है।
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इस वर्ष के संस्करण में 218 देशों को शामिल किया गया है और इसके परिणाम जून 2027 के अंत तक वैश्विक संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किए जाएंगे। श्रीलंका पहली बार 2019 में उच्च-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंचा था, लेकिन बाद में आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ने और घरेलू एवं बाहरी दबावों के कारण आय स्तर में गिरावट आने से वह फिर निम्न-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आ गया था।
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