Standard Chartered ने बदली India में Business Strategy, अब सिर्फ अमीर ग्राहकों पर होगा फोकस।

भारत में विदेशी बैंकों की कारोबारी रणनीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है, जहां स्टैंडर्ड चार्टर्ड, सिटीग्रुप और डॉयचे बैंक जैसे प्रमुख बैंक अपना खुदरा कारोबार समेटकर उच्च आय वर्ग के ग्राहकों और निवेश सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
भारत में विदेशी बैंकों की कारोबारी रणनीति तेजी से बदल रही है। इसी कड़ी में ब्रिटेन के प्रमुख बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने पिछले एक वर्ष के दौरान भारत में अपनी शाखाओं की संख्या कम कर दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, बैंक की शाखाएं लगभग 100 से घटकर अब 80 रह गई हैं। इसके साथ ही बैंक अब पारंपरिक खुदरा बैंकिंग की बजाय संपन्न ग्राहकों और निवेश सेवाओं पर अधिक ध्यान देने की तैयारी कर रहा है।
बताया जा रहा है कि बैंक ने यह कदम भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए उठाया है। निजी और सरकारी बैंकों की मजबूत मौजूदगी के कारण विदेशी बैंकों के लिए सामान्य खुदरा बैंकिंग कारोबार पहले की तुलना में कम लाभदायक होता जा रहा है। ऐसे में कई अंतरराष्ट्रीय बैंक अपनी रणनीति बदलकर उच्च आय वर्ग के ग्राहकों और निवेश आधारित सेवाओं पर फोकस कर रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने एक-दूसरे के नजदीक स्थित कई शाखाओं का विलय कर दिया है, जबकि कुछ अलग-अलग स्थानों पर मौजूद शाखाओं का संचालन बंद कर दिया गया है। हालांकि बैंक ने इन शाखाओं से जुड़े भारतीय रिजर्व बैंक के लाइसेंस अपने पास सुरक्षित रखे हैं। इसका मतलब यह है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन लाइसेंस का उपयोग किसी दूसरे स्थान पर नई शाखा खोलने के लिए किया जा सकता है।
बता दें कि शाखाओं की संख्या कम होने के बावजूद स्टैंडर्ड चार्टर्ड अभी भी भारत में शाखा आधारित व्यवस्था के तहत काम करने वाले विदेशी बैंकों में सबसे बड़ा नेटवर्क रखने वाला बैंक बना हुआ है। बैंक का कहना है कि यह बदलाव ग्राहकों की बदलती जरूरतों और नए कारोबारी माहौल को ध्यान में रखकर किया गया है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अनुसार, अब उसका मुख्य उद्देश्य केवल एक सेवा देने के बजाय एक ही ग्राहक को कई तरह की बैंकिंग और निवेश सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी रणनीति के तहत बैंक अपने मौजूदा निवेश सेवा केंद्रों की संख्या 20 से बढ़ाकर वर्ष 2026 के अंत तक लगभग 30 करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा बड़े निवेश केंद्र, बेहतर डिजिटल सुविधाएं और अधिक संबंध प्रबंधकों की नियुक्ति पर भी निवेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बैंक ने अपने कारोबार में कई बड़े बदलाव किए हैं। अक्टूबर 2024 में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने लगभग 4,100 करोड़ रुपये की मानक परिसंपत्तियों के साथ अपना व्यक्तिगत ऋण कारोबार कोटक महिंद्रा बैंक को बेच दिया था। इसके बाद इस वर्ष बैंक ने अपने लगभग साढ़े चार लाख ऋण कार्ड खातों को फेडरल बैंक को ट्रांसफर करने का समझौता भी किया। हालांकि बैंक ने ऐसे डेढ़ लाख से ढाई लाख ऋण कार्ड अपने पास रखे हैं, जो उसके अन्य बैंकिंग संबंधों से जुड़े हुए हैं।
विदेशी बैंकों की यह रणनीति केवल स्टैंडर्ड चार्टर्ड तक सीमित नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार, सिटीग्रुप ने वर्ष 2023 में अपना खुदरा बैंकिंग कारोबार लगभग 11,603 करोड़ रुपये में एक्सिस बैंक को बेच दिया था। वहीं डॉयचे बैंक ने भी भारत में अपने खुदरा बैंकिंग, संपन्न निजी बैंकिंग और निवेश सेवाओं के कारोबार को 282 करोड़ रुपये में कोटक महिंद्रा बैंक को बेचने पर सहमति जताई है।
दूसरी ओर सभी विदेशी बैंक शाखाएं कम नहीं कर रहे हैं। एचएसबीसी ने वर्ष 2025 में भारत के बढ़ते संपन्न ग्राहक वर्ग को देखते हुए अमृतसर, भोपाल, भुवनेश्वर, नवी मुंबई और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहरों में 20 नई शाखाएं खोलने की योजना की घोषणा की थी।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का निवेश सेवाओं पर ध्यान केवल भारत तक सीमित नहीं है। हाल ही में बैंक ने ब्लैकरॉक के साथ मिलकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संपन्न तथा उच्च आय वर्ग के निवेशकों के लिए एक बहु-संपत्ति निवेश कोष शुरू करने की भी घोषणा की है। इससे साफ है कि बैंक आने वाले वर्षों में पारंपरिक बैंकिंग के बजाय निवेश सेवाओं और उच्च आय वर्ग के ग्राहकों के लिए विशेष वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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