Shivraj Singh Chouhan ने NMMS App का उन्नत वर्जन किया लॉन्च

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी योजना में फर्जी हाजिरी रोकने के लिए एनएमएमएस ऐप का नया संस्करण जारी किया है। आईआईटी मद्रास के सहयोग से तैयार इस तकनीक में बिना इंटरनेट ऑफलाइन हाजिरी दर्ज करने और एआई आधारित चेहरे के सत्यापन की सुविधा जोड़ी गई है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत फर्जी हाजिरी रोकने के लिए शुक्रवार को राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप का उन्नत संस्करण पेश किया। ऐप के नए संस्करण में सुरक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है। साथ ही, नेटवर्क संपर्क की असुविधा वाले क्षेत्रों में भी ऑफलाइन माध्यम से हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।

चौहान ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना, उनकी मजदूरी सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से तथा निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो।” उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से जवाबदेही मजबूत होनी चाहिए, लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्याओं के कारण वास्तविक श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास और अन्य एजेंसियों के तकनीकी सहयोग से विकसित इस उन्नत ऐप में उपकरण-स्तर की सुरक्षा जांच, कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित चेहरे का सत्यापन, ‘सजीवता पहचान’ और ऐप की नकल बनाने तथा उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपाय शामिल किए गए हैं। चौहान ने कहा कि फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने और दूसरे व्यक्तियों के नाम पर मजदूरी का दावा किए जाने की शिकायतों के मद्देनजर सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी हो गया था।

नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर कार्यस्थलों पर ऑफलाइन हाजिरी दर्ज की जा सकेगी। मस्टर रोल बंद होने के बाद नेटवर्क बहाल होने पर इन प्रविष्टियों को अपलोड किया जा सकेगा। बुजुर्ग श्रमिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और मोबाइल उपकरणों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का सामना करने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध है।

चौहान ने कहा, “जिन लोगों को रोजगार की जरूरत है, उन्हें काम उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” चौहान ने यह भी बताया कि देशभर में 10.997 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके साथ ही दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ किसान आईडी बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश अब केवल 30,000 आईडी दूर है।

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