वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, RBI बुलेटिन में घरेलू मांग को मिला श्रेय

वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, RBI बुलेटिन में घरेलू मांग को मिला श्रेय
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भारतीय रिजर्व बैंक के अक्टूबर बुलेटिन के अनुसार भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और नीतिगत कदम विकास को सहारा दे रहे हैं। ऊर्जा का आयातक होने के बावजूद देश में मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र जीडीपी वृद्धि को गति प्रदान कर रहे हैं। वहीं हाल के महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ने से मौद्रिक नीति में जरूरी बदलाव के संकेत भी मिले हैं।

पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती महंगाई और मौजूदा व्यापार तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और लक्षित नीतिगत उपाय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शुक्रवार को जारी बुलेटिन में यह बात कही गई। अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक वाले लेख के मुताबिक, पश्चिम एशिया में नए सिरे से भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने महंगाई का दबाव बढ़ाया है।

इसके चलते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाई हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल की ऊंची दरों ने भी राजकोषीय और वित्तीय स्थिरता पर इसके असर को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। लेख के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से 2026 और 2027 के लिए वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का अनुमान बढ़ाने के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कई बड़े जोखिम बने हुए हैं।

इनमें बढ़ती महंगाई, ऊंचा सार्वजनिक कर्ज और राजकोषीय स्थिरता से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं। हालांकि, कृत्रिम मेधा (एआई) से मिलने वाले लाभ और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव कुछ राहत देने वाले कारक हैं। लेख में कहा गया है कि ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद भारत में घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को समर्थन मिला है।

उद्योग और सेवा क्षेत्र के महत्वपूर्ण आंकड़ें भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाते हैं। आरबीआई के लेख के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई हाल के महीनों में बढ़ी है और इसका असर अधिक क्षेत्रों तक फैलने के संकेत मिले हैं। ऐसे में मौद्रिक नीति के रुख में इसके अनुरूप बदलाव की जरूरत हो सकती है।

लेख में कहा गया है, विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने कई नियामकीय उपाय किए हैं, जिनसे वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है। एफसीएनआर (बी) अदला-बदली सुविधा के तहत मजबूत प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार को भी समर्थन मिला। अगस्त में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेश से भेजे गए धन के प्रवाह में मजबूती आई।

अगस्त, 2026 में एफडीआई प्रवाह मजबूत बना रहा। संचार, विविध सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में कुल एफडीआई का दो-तिहाई से अधिक निवेश आया। अमेरिका, सिंगापुर और मॉरीशस से करीब 72 प्रतिशत एफडीआई प्रवाह हुआ।

बुलेटिन के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में 19 तारीख तक भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख रहा। वैश्विक तनाव बढ़ने, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा प्रभावित हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली से विदेशी निवेश पर दबाव पड़ा, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार बने रहे।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।

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