सूक्ष्म व छोटे Exporters के प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार: Piyush Goyal

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन के तहत सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के महंगे प्रमाणन का पूरा वित्तीय बोझ सरकार वहन करेगी। यूरोपीय संघ के सीबीएएम और ईयूडीआर नियमों के अनुपालन की लागत से जूझ रहे निर्यातकों को राहत देने के लिए उन्होंने डीजीएफटी से संपर्क करने को कहा है।

(फाइल फोटो के साथ) (राजेश राय) बर्लिन, 23 अक्टूबर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के तहत सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के महंगे प्रमाणन का पूरा खर्च उठाने को तैयार है। उन्होंने मौजूदा और नए निर्यातकों से वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय से संपर्क करने का आग्रह किया। सरकार ने पिछले साल नवंबर में छह वित्त वर्षों के लिए 25,060 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस मिशन को मंजूरी दी थी।

इस मिशन को दो उप-योजनाओं के जरिये लागू किया जा रहा है। इनमें ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के लिए 10,401 करोड़ रुपये और ‘निर्यात दिशा’ के लिए 14,659 करोड़ रुपये का प्रावधान है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस मिशन के तहत हम दुनिया में कहीं भी निर्यात करने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति की मदद करने को तैयार हैं।

हम उन्हें सहायता देंगे। सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के मामले में हम प्रमाणन का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, यदि कोई प्रमाणन या प्रक्रिया बहुत महंगी है, तो उसका खर्च भी हम उठाने को तैयार हैं।’’ गोयल ने सभी उत्पाद श्रेणियों और क्षेत्रों के मौजूदा तथा नए निर्यातकों से प्रमाणन संबंधी सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से संपर्क करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि सरकार पूरा खर्च वहन करेगी। मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ के नियमों का अनुपालन करने की लागत (जिसमें कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) और यूरोपीय संघ का वनोन्मूलन विनियमन (ईयूडीआर) शामिल हैं) सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों के लिए सरकार उठाएगी, जबकि अन्य कारोबारों को उनकी श्रेणी के अनुसार सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम पुराने एवं नए दोनों भारतीय निर्यातकों से इसका लाभ उठाने का आग्रह करते हैं, ताकि अधिक लोगों को नए उत्पादों तथा नए बाजारों में जाने के लिए प्रोत्साहन मिले और इस कारोबार में नए निर्यातकों को बढ़ावा मिले।’’ मंत्री की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने यूरोपीय नियमों का अनुपालन करने की ऊंची लागत को लेकर चिंता जताई है।

भारत का यूरोपीय संघ के देशों को निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 4.57 प्रतिशत घटकर 72.4 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर था। पिछले वित्त वर्ष में भारत के कुल वस्तु निर्यात में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, इन देशों से आयात वित्त वर्ष 2025-26 में नौ प्रतिशत बढ़कर 66.18 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर था।

पिछले वित्त वर्ष में भारत के कुल वस्तु आयात में इन देशों की हिस्सेदारी करीब नौ प्रतिशत थी।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़