IndiGo फिलहाल नहीं करेगी Fuel Hedging, लंबी उड़ानों के विस्तार पर लेगी फैसला

इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श के अनुसार कंपनी फिलहाल ईंधन की हेजिंग पर विचार नहीं कर रही है। हालांकि, लंबी दूरी की उड़ानों के विस्तार के समय इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है। ईंधन की बढ़ती लागत और रुपये में गिरावट के कारण इंडिगो को जुलाई-सितंबर तिमाही में भारी घाटा उठाना पड़ा था।
इंडिगो के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने सोमवार को कहा कि विमानन कंपनी फिलहाल ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव पर विचार नहीं कर रही है। वहीं कंपनी लंबी दूरी की उड़ानों का विस्तार शुरू करने के बाद इस विकल्प पर विचार कर सकती है। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी के प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ईंधन की बढ़ती कीमतों से विमानन कंपनियों का परिचालन खर्च बढ़ रहा है। खुद इंडिगो को भी जुलाई-सितंबर तिमाही में ईंधन की ऊंची कीमतों और रुपये में गिरावट के कारण घाटा हुआ था।
पश्चिम एशिया संकट और लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण हाल के महीनों में ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अगस्त में सीईओ का पद संभालने के बाद विमानन उद्योग के अनुभवी वॉल्श ने अपनी पहली प्रत्यक्ष बातचीत में कहा कि ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव (हेजिंग) का फैसला लेना बहुत मुश्किल होता है। वॉल्श ने कहा, ‘‘ यह (हेजिंग) जोखिम का प्रबंधन करने के बारे में है। इसका मकसद ईंधन की कीमतों को लेकर दांव लगाना नहीं है, बल्कि स्थिरता देना और जोखिम से बचाव करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज यह कहना काफी आसान है कि भारतीय घरेलू बाजार की कोई भी विमानन कंपनी ‘हेजिंग’ नहीं कर रही है।’’
उन्होंने कहा कि अगर इंडिगो घरेलू बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों के ‘हेजिंग’ नहीं करने के बावजूद ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए इस रणनीति का अपनाती है, तो इससे एक अतिरिक्त जोखिम पैदा होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति ‘हेजिंग’ के मूल सिद्धांत के ही खिलाफ होगी। ईंधन की लागत किसी विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च का करीब 40 प्रतिशत होती है। वॉल्श ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि लंबी दूरी की उड़ानों का विस्तार करने के संदर्भ में हमें इस बात पर विचार करना होगा कि हम क्या करेंगे, क्योंकि जिन विमानन कंपनियों से हमारी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है, उनमें से ज्यादातर अलग-अलग स्तर पर ‘हेजिंग’ करती हैं।’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विमानन कंपनियों की ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव की कोई एक समान नीति नहीं है। उन्होंने यूरोपीय विमानन कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनमें से कुछ 70-80 प्रतिशत तक हेजिंग करती हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों से विमानन कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहे असर के बीच वॉल्श ने कहा कि उद्योग के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है और इंडिगो इन चुनौतियों से निपटेगी। इंडिगो को जुलाई-सितंबर तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। ईंधन की ऊंची लागत और रुपये के मूल्य में गिरावट से उसकी लाभप्रदता प्रभावित हुई थी।
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