Google DeepMind में बगावत: Military AI सौदे पर भड़के कर्मचारी, बनाई शक्तिशाली Union

अमेरिकी रक्षा विभाग और इजरायल के साथ गूगल के एआई सौदों पर विवाद के बाद, डीपमाइंड के कर्मचारियों ने औपचारिक रूप से यूनियन का गठन किया है। इस यूनियन के माध्यम से, कर्मचारी तकनीक के सैन्य उपयोग पर रोक लगाने और नैतिक आधार पर काम से इनकार करने का अधिकार सुरक्षित करना चाहते हैं।
ब्रिटेन से एक अहम खबर सामने आई है, जहां तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और चिंताओं को लेकर बड़ा कदम उठाया। मौजूद जानकारी के अनुसार, गूगल की एआई इकाई गूगल डीपमाइंड के कर्मचारियों ने यूनियन बनाने के पक्ष में मतदान किया।
बताया जा रहा है कि यह फैसला अप्रैल में लिया गया था, लेकिन अब कर्मचारियों ने औपचारिक रूप से प्रबंधन को पत्र भेजकर कम्युनिकेशन वर्कर्स यूनियन और यूनाइट द यूनियन को अपने प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की मांग की । गौरतलब है कि यदि कंपनी इस मांग को स्वीकार करती है, तो करीब एक हजार कर्मचारी इस यूनियन के दायरे में आ सकते हैं।
इस फैसले के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों में असंतोष उस समय बढ़ा जब कंपनी और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ा समझौता सामने आया। कुछ कर्मचारियों का मानना है कि इस तरह के समझौते से तकनीक का उपयोग सैन्य और निगरानी गतिविधियों में हो सकता है, जो उनके नैतिक मूल्यों के खिलाफ है।
एक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी की तकनीक का इस्तेमाल इजरायल रक्षा बल द्वारा किए जाने की खबरों ने भी कर्मचारियों के बीच असहजता पैदा की है। बता दें कि पहले भी यह रिपोर्ट सामने आई थी कि कंपनी ने गाजा संघर्ष के दौरान अपनी तकनीक तक पहुंच बढ़ाई थी। साथ ही वर्ष 2021 में अमेजन के साथ मिलकर इजरायल सरकार के साथ एक बड़ा समझौता किया गया था।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में गूगल के कर्मचारियों और निवेशकों के बीच इस तरह की चिंताएं लगातार बढ़ती रही हैं। खासतौर पर तब, जब कंपनी ने पिछले साल सैन्य उपयोग के लिए एआई न बनाने की अपनी पुरानी प्रतिबद्धता को हटा दिया था।
इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी पुष्टि की है कि उसने कई प्रमुख तकनीकी कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इनमें स्पेसएक्स, ओपनएआई, एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज शामिल हैं। हालांकि एन्थ्रोपिक इस सूची में शामिल नहीं है, जबकि उसकी तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य अमेरिकी सेना को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ताकत देना और युद्ध से जुड़े निर्णयों में बढ़त हासिल करना है। हालांकि, समझौते में यह भी कहा गया है कि तकनीक का उपयोग बिना मानवीय नियंत्रण के स्वचालित हथियारों या व्यापक निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा, लेकिन यह शर्त बाध्यकारी नहीं मानी जा रही है।
कर्मचारियों ने यूनियन के जरिए कुछ प्रमुख मांगें भी रखी हैं। इनमें यह शामिल है कि कंपनी ऐसी तकनीक विकसित न करे जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को नुकसान पहुंचाना हो, एक स्वतंत्र नैतिक निगरानी तंत्र बनाया जाए और कर्मचारियों को यह अधिकार मिले कि वे किसी परियोजना में नैतिक आधार पर काम करने से मना कर सकें।
गौरतलब है कि अगर कंपनी इन मांगों को नहीं मानती है, तो कर्मचारी विरोध प्रदर्शन या कामकाज धीमा करने जैसे कदम उठा सकते हैं।
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