त्योहारी सीजन में E-commerce और Quick Commerce पर बढ़ी खरीदारी की उम्मीद

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देश के ई-कॉमर्स और फटाफट डिलीवरी मंच आगामी त्योहारी सीजन की मांग पूरी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शोध रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारतीय ऑनलाइन बाजार 345 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। गैर-महानगरीय क्षेत्रों के ग्राहक कीमतों की तुलना कर बजट के अनुकूल बेहतर उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

नयी दिल्ली, छह सितंबर ई-कॉमर्स और त्वरित वाणिज्यक यानी फटाफट सामान पहुंचाने वाले मंच त्योहारी मौसम के लिए तैयार हैं। उद्योग और विश्लेषकों को इस दौरान बिक्री मूल्य में अच्छी वृद्धि की उम्मीद है, हालांकि ग्राहकों के खर्च के रुझान अलग-अलग रह सकते हैं। प्रीमियम यानी महंगे उत्पादों की मांग के साथ-साथ कीमत को लेकर सतर्क ग्राहक बेहतर सौदों की तलाश भी जारी रखेंगे।

ई-कॉमर्स क्षेत्र में वृद्धि के प्रमुख आधार के रूप में उभर रहे त्वरित वाणिज्यक मंच की पहुंच रोजमर्रा के किराना सामान से आगे बढ़कर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौंदर्य उत्पादों तक हो रही है। हाल के त्योहारों के दौरान खरीदारी के बढ़े चलन के आधार पर इस त्योहारी मौसम में भी इसके और तेजी पकड़ने की उम्मीद है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के शोध विश्लेषक शुभम निमकर ने कहा कि त्योहारी मौसम बिक्री मूल्य के लिहाज से अच्छा, लेकिन मात्रा के लिहाज से अधिक संतुलित रह सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्राहक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण वे अधिक सोच-समझकर खरीदारी करेंगे। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रीमियम उत्पादों की मांग अच्छी रहने की संभावना है, जबकि कीमत को लेकर सतर्क ग्राहक बेहतर सौदों पर अधिक ध्यान देंगे। शोध परामर्श कंपनी इन्फिसम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2024 के 125 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब तीन गुना होकर 345 अरब अमेरिकी डॉलर हो सकता है।

इस दौरान 18.4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर रहने का अनुमान है। त्वरित वाणिज्य के तेजी से विस्तार और कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से इसे गति मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, दशक के अंत तक भारत के खुदरा खर्च में ई-कॉमर्स क्षेत्र की हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत हो सकती है और इसके जरिये 42-44 करोड़ ऑनलाइन ग्राहक खरीदारी कर सकते हैं।

जेप्टो के मुख्य कारोबार अधिकारी देवेंद्र मील ने कहा कि त्योहारी खरीदारी अब अधिक विविध होती जा रही है। कंपनियां अलग-अलग मौकों और क्षेत्रों के लिए त्योहार विशेष उत्पाद पेश कर रही हैं, जिनमें एकादशी और तीज जैसे छोटे त्योहार भी शामिल हैं। स्नैपडील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अचिंत सेतिया ने कहा कि त्वरित वाणिज्य मुख्य रूप से महानगरों में तुरंत सामान उपलब्ध कराने की जरूरत पूरी कर रहा है, जबकि गैर-महानगरीय ग्राहक सोच-समझकर खरीदारी करते हैं और कीमत की तुलना करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे ग्राहकों के लिए कीमत के लिहाज से बेहतर विकल्प तलाशना सबसे प्रमुख व्यवहार बना हुआ है। हमारा खरीदार सही कीमत पर अच्छी गुणवत्ता चाहता है, केवल ब्रांड के नाम के लिए अधिक कीमत नहीं देना चाहता।’’ उन्होंने कहा कि ग्राहक अपने बजट के भीतर बेहतर गुणवत्ता या अधिक पसंद किए जाने वाले उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं। गैर-महानगर क्षेत्र त्योहारी मांग के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।

सेतिया के अनुसार, स्नैपडील की 80 प्रतिशत से अधिक बिक्री गैर-महानगर क्षेत्रों से आती है। मीशो के प्रवक्ता ने कहा कि रक्षाबंधन के दौरान उसके 73 प्रतिशत ऑर्डर गैर-महानगरीय बाजारों से आए और विक्रेताओं की भागीदारी सालाना आधार पर 72 प्रतिशत बढ़ी।

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