Assam के Tea Growers को अब किसान का दर्जा, Farmer ID से खुलेंगे सरकारी योजनाओं के दरवाजे

असम सरकार ने छोटे चाय उत्पादकों को किसान पंजीकरण पोर्टल में शामिल कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे उन्हें अब किसान पहचान पत्र के माध्यम से उर्वरक, संस्थागत ऋण और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को कम करना और राज्य के कुल चाय उत्पादन में लगभग आधा योगदान देने वाले इन उत्पादकों को सरकारी सहायता तक सीधी पहुंच प्रदान करना है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में छोटे चाय उत्पादक अब एकीकृत मंच के माध्यम से विभिन्न सरकारी लाभ प्राप्त कर सकेंगे। शर्मा ने कहा कि छोटे चाय उत्पादक अब किसान पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण कर सकेंगे और उन्हें किसान पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। इसके जरिए वे उर्वरक, सरकारी योजनाओं के लाभ, बेहतर शर्तों पर संस्थागत ऋण और अन्य कृषि सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि चाय क्षेत्र उद्योग विभाग के अंतर्गत ही रहेगा, लेकिन इस कदम से छोटे चाय उत्पादकों को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा।
शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘आज असम के लाखों छोटे चाय उत्पादकों के लिए ऐतिहासिक दिन है। चाय और बागान श्रेणी की भूमि अब किसान पंजीकरण पोर्टल में शामिल कर ली गई है।’’ उन्होंने इस पहल को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि किसान पहचान पत्र प्रणाली से जरूरत के अनुसार समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही मंच के माध्यम से मिलेगा, संस्थागत ऋण आसानी से उपलब्ध होगा और चाय उत्पादकों के शोषण में बिचौलियों की भूमिका कम होगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह चाय उत्पादकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब वे एक ही मंच के माध्यम से सरकार की सभी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।’’
कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि यह निर्णय असम के छोटे चाय उत्पादकों को बहुप्रतीक्षित सहायता उपलब्ध कराएगा। वर्तमान में राज्य के कुल चाय उत्पादन में उनका योगदान लगभग आधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘असम के छोटे चाय उत्पादकों ने पीढ़ियों से अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर असमकी पहचान को मजबूत किया है।’’ हजारिका ने कहा कि किसान पंजीकरण पोर्टल में चाय और बागान श्रेणी की भूमि को शामिल किए जाने से पात्र उत्पादकों को किसान पहचान पत्र मिलेगा और वे सरकारी सहायता का लाभ उठा सकेंगे।
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