Starlink को भारत में न मिले ब्रॉडबैंड लाइसेंस, Swadeshi Jagran Manch ने की केंद्र से मांग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए केंद्र से एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को वाणिज्यिक उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की मंजूरी न देने की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि स्टारलिंक की लेजर तकनीक भारतीय गेटवे को बायपास कर सकती है, जिससे कानूनी निगरानी प्रभावित होगी।
स्वदेशी जागरण मंच ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में वाणिज्यिक उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की अनुमति न दे। मंच ने आरोप लगाया कि कंपनी की प्रौद्योगिकी भारत की विनियामक जरूरतों को पूरा करने के मामले में चुनौतियां पैदा करती है। यहां तीन मूर्ति चौक पर स्टारलिंक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपे गए एक ज्ञापन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन ने कहा कि स्टारलिंक द्वारा उपग्रहों के बीच सीधे डेटा भेजने के लिए लेजर-आधारित सैटेलाइट लिंक का इस्तेमाल, सुरक्षा से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों में भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक के दायरे में न हो होने को लेकर चिंता पैदा करता है।
मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने ज्ञापन में लिखा, ‘‘सरकार इस प्रणाली की जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सुरक्षा से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों में डेटा भारतीय गेटवे को ‘बायपास’ न करे।’’ स्वदेशी जागरण मंच ने दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब देने के बजाय, मस्क ने भारतीय व्यवसायों और सरकार पर परोक्ष रूप से आरोप लगाए हैं। महाजन ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि स्टारलिंक शायद उन खास जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। नतीजतन, ऐसा लगता है कि एलन मस्क या तो सरकार के खिलाफ जन दबाव बनाकर लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर हताशा में ऐसे बयान दे रहे हैं।’’ मंच ने यह भी दावा किया कि स्टारलिंक के अंतर-उपग्रह लेजर लिंक के जरिए डेटा भारतीय गेटवे से गुजरे बिना विदेशी अवसंरचना से होकर जा सकता है, जिससे कानूनी निगरानी और प्रवर्तन का काम और मुश्किल हो सकता है।
महाजन ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अक्सर इंटरनेट सेवाओं को बंद करना जरूरी हो जाता है।
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