भारत का यह 'नाग' डसेगा तो दुश्मन पानी भी नहीं मांग पाएगा, 50 किमी दूर से दुश्मन के टैंकों को बना सकता है निशाना, क्या हैं खूबियां?

Nagastra
ANI
अभिनय आकाश । Oct 23 2026 12:19PM

सोलर डिफेंस ने भारतीय सेना को अत्याधुनिक नागास्त्र 2 एंटी-टैंक लोइटर म्यूनिशन सिस्टम सौंपा है, जो जैमिंग रोधी तकनीक और 50 किलोमीटर की मारक क्षमता से लैस है। वहीं स्वदेशी तेजस एमके1ए फाइटर प्रोग्राम को बढ़ावा देते हुए जीई एयरोस्पेस ने एचएएल को चार और एफ404 इंजन सौंपे हैं।

450 'नागास्त्र-1R' कामिकेज़ ड्रोन सौंपने के एक महीने बाद, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को अपना 'नागास्त्र 2' एंटी-टैंक लोइटर म्यूनिशन सिस्टम सौंप दिया है। 'नागास्त्र 2' में दिन और रात में निगरानी करने वाले कैमरे और 4 किलोग्राम का 'टैंडेम शेप्ड-चार्ज' वॉरहेड लगा है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह 650 mm तक के 'रोल्ड होमोजेनियस आर्मर' (RHA) से सुरक्षित लक्ष्यों को भी भेद सके। 

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नागास्त्र-2 कामिकेज़ ड्रोन की विशेषताएं


यह सिस्टम 'रिकवर और रीयूज़' (वापस लाने और दोबारा इस्तेमाल करने) मोड में 25 किमी और 'फायर-एंड-फॉरगेट' (दागो और भूल जाओ) मोड में 50 किमी की ऑपरेशनल रेंज देता है, और यह 60 मिनट तक लगातार काम कर सकता है। इन क्षमताओं की मदद से बख्तरबंद लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाने में काफी लचीलापन मिलता है। नागास्त्र-2 की एक अहम तकनीकी खूबी इसकी 'इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेज़र्स' (ECCM) क्षमता है, जिसे ऐसे युद्धक्षेत्रों में इसकी मजबूती बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ इलेक्ट्रॉनिक हथियारों का इस्तेमाल हो रहा हो। यह क्षमता इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के खतरों जैसे कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग—के बीच भी काम करने में सक्षम बनाती है। नागास्त्र-2 का विकास और इसकी आपूर्ति, भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। इससे भारतीय सेना को तकनीक पर आधारित, अत्याधुनिक 'लोइटर म्यूनिशन' (loiter munition) सिस्टम मिल रहे हैं।
नागास्त्र-1R का इस्तेमाल सुसाइड अटैक (आत्मघाती हमलों) के लिए किया जा सकता है; इसकी खूबियां जानें
नागास्त्र-1R को सेना की खास जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका इस्तेमाल कम दूरी के ऑपरेशनों में 'कामिकेज़' (आत्मघाती) हमलों के लिए किया जा सकता है। इसमें उड़ान के दौरान ही मिशन को रद्द करने और ड्रोन को सुरक्षित वापस लाने की क्षमता भी है। कंपनी के अनुसार, कई लाइव ट्रायल के दौरान लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाने की क्षमता के आधार पर इस सिस्टम की सटीकता को परखा गया था। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्षों के बीच, स्वदेशी रूप से विकसित इस सिस्टम को एक किफायती विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो सटीक निशाना लगाने में सक्षम है। SDAL अब अपने 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (हवा में मंडराने वाले हथियार) सिस्टम की तैनाती बढ़ाने और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

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तेजस Mk1A को बड़ा बढ़ावा मिला


हाल ही में, भारत के स्वदेशी तेजस Mk1A फाइटर प्रोग्राम को एक और बड़ा बढ़ावा मिला है। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी GE एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को चार और F404-IN20 इंजन सौंपे हैं। सितंबर में भेजी गई इस नई खेप के साथ, तेजस Mk1A बेड़े के लिए HAL को अब तक कुल 14 इंजन मिल चुके हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब HAL को 2021 में GE एयरोस्पेस के साथ हुए एक समझौते के तहत 99 F404-IN20 इंजन मिल रहे हैं। 5,375 करोड़ रुपये के इस समझौते में तेजस Mk1A बेड़े के लिए जरूरी इंजनों की आपूर्ति शामिल है। एक बयान में GE एयरोस्पेस ने कहा, "GE एयरोस्पेस ने सितंबर 2026 में चार F404-IN20 इंजन भेजे हैं। हम भारत के स्वदेशी तेजस फाइटर जेट्स को पावर देने के लिए जरूरी इंजन उपलब्ध कराने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं।

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