Shiv Sena Case: SC में शिंदे गुट की दलील, कहा- Uddhav Thackeray ने पार्टी को बनाया 'निजी जागीर'

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अबेंच के सामने शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने दलीलें रखीं। शिंदे गुट के वकील ने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष था और इसी वजह से उनके गुट ने दावा किया कि वह मूल शिवसेना है।
शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने बुधवार को दावा किया कि पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने संगठन में सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने और उसे अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक ढांचा तैयार किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे ने 2018 में पार्टी संविधान में संशोधन कर इस व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अबेंच के सामने शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने दलीलें रखीं। शिंदे गुट के वकील ने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष था और इसी वजह से उनके गुट ने दावा किया कि वह मूल शिवसेना है।
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शिंदे गुट की तरफ से चुनाव चिह्न के मुद्दे पर बहस करने वाले कौल ने उद्धव गुट की इस दलील का विरोध किया कि ECI ने शिवसेना के 2018 के पार्टी संविधान की वैधता की जांच करते समय ऐसे अधिकार का इस्तेमाल किया जो कानून में नहीं है। उन्होंने कहा कि 1994 से ही, ECI अलग-अलग आदेशों के ज़रिए सभी राजनीतिक दलों को लिखता रहा है - चाहे चिट्ठियों के ज़रिए हो या जारी किए गए आदेशों के ज़रिए - कि आपके संविधान लोकतांत्रिक होने चाहिए। वजह यह है कि अगर कामचलाऊ व्यवस्था (ad-hocism) और मनमानी होगी, तो हम कैसे तय करेंगे कि बहुमत किसके पास है? राजनीतिक दल का बहुमत एक अहम पैमाना है, जिसमें बड़ी संख्या में चुने हुए सदस्य होने चाहिए। क्योंकि यही कार्यकर्ताओं और आम लोगों की इच्छा को दिखाता है। अगर वे चुने हुए नहीं हैं, बल्कि कामचलाऊ व्यवस्था से हैं, तो हम कभी तय नहीं कर पाएंगे। और फिर इन आदेशों में ECI ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का यह नज़रिया इतना सामंती और तानाशाही वाला है कि वे पार्टियों को अपनी निजी जागीर समझते हैं। और यह सिर्फ़ शिवसेना के मामले में नहीं है... इससे पहले भी, दूसरे राजनीतिक दलों के मामले में ECI ने कहा था कि पार्टी में चुनाव होने चाहिए और ऐसा नहीं हो सकता कि 1-2 लोग ही बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त कर दें। साफ़ तौर पर चिट्ठियाँ भेजी गईं और कहा गया कि RP एक्ट में धारा 29A के आने के बाद, पार्टियों को यह पक्का करना चाहिए कि पार्टी के संविधान लोकतांत्रिक हों।
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