Saharanpur: मस्जिद के मलबे के नीचे मिला 15 फीट गहरा कुआं, कलेक्ट्रेट परिसर में मचा हड़कंप

कलेक्ट्रेट परिसर में अदालत के आदेश के बाद अवैध रूप से बनी मस्जिद को गिरा दिया गया। इसके 24 घंटे बाद मलबा साफ करने के दौरान मस्जिद के नीचे 15 फीट गहरा एक कुआं मिला। भारी स्लैब के नीचे मिले इस कुएं के इतिहास और निर्माण को लेकर फिलहाल प्रशासन जांच कर रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने के करीब 24 घंटे बाद रविवार को मलबा हटाने के दौरान एक कुआं मिला है। मलबा साफ कर रही टीम को यह कुआं मस्जिद के नीचे मिला। बताया जा रहा है कि कुएं की गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर है। कुएं के ऊपर एक भारी स्लैब डाला गया था। जब पोकलेन मशीन से स्लैब नहीं टूटा तो टीम ने कटर की मदद से उसे हटाया। स्लैब हटाते ही नीचे कुआं दिखाई दिया। फिलहाल यह साफ नहीं है कि कुआं कब बनाया गया था और यह कितना पुराना है।
शनिवार को गिराई गई थी मस्जिद
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी दो मंजिला मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर से गिराया गया था। यह कार्रवाई जिला जज न्यायालय के 2 सितंबर के आदेश के बाद की गई। कार्रवाई के लिए सुबह-सुबह सात बुलडोजर लगाए गए थे। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई को अपने आदेश में मस्जिद के निर्माण को अवैध माना था।
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील की थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला जज ने 2 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी थी।
#WATCH | Saharanpur, Uttar Pradesh: A well has been discovered at the demolition site where a mosque inside the Saharanpur Collectorate was demolished yesterday.
SDM Sadar Subodh Kumar stated that technical teams and concerned agencies will investigate to determine the scale… pic.twitter.com/WGOxXRRV3T— ANI (@ANI) September 6, 2026
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विकास त्यागी की शिकायत के बाद शुरू हुआ था मामला
इस मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर कब्जा करके मस्जिद बनाई गई है। शिकायत की जांच के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में मामला दर्ज किया गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी।
315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया है। अदालत ने संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। रिकॉर्ड में फसली वर्ष 1324 और 1359 में इस जमीन को कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज पाया गया था। इसके बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए जमीन खाली कराने और कब्जाधारी से करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया था।
जिला जज ने भी खारिज की अपील
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ 20 जुलाई को जिला जज कोर्ट में अपील की थी। करीब डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस प्रशासन ने शुक्रवार रात ही कलेक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी कर दी थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
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कुएं को लेकर अभी क्या पता चला?
मस्जिद के मलबे के नीचे मिला कुआं इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुआं कितना पुराना है, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था और इसे कब बनाया गया था। आगे की जांच के बाद ही इसकी स्थिति और इतिहास के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।
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