Revanth Reddy समाधान के बजाय राजनीति में व्यस्त, El Nino पर BRS का Congress पर हमला

बीआरएस प्रवक्ता रावुल श्रीधर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर एल नीनो के नाम पर लोगों को डराने और समस्या सुलझाने के बजाय राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। वहीं, मुख्यमंत्री रेड्डी ने लंबे सूखे और जल संकट की चेतावनी देते हुए इससे निपटने के लिए जनता की भागीदारी और एक समर्पित प्रशासनिक ढांचा बनाने पर जोर दिया है।
'एल नीनो' (El Niño) पर हुई बैठक के बाद, BRS के प्रवक्ता रावुल श्रीधर ने राज्य के कामकाज को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समस्या का समाधान खोजने के बजाय कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। ANI से बातचीत में श्रीधर ने दावा किया कि मौसम से जुड़ी इस स्थिति को संभालने के मामले में जनता का भरोसा जीतने के बजाय, मुख्यमंत्री रेड्डी लोगों को 'एल नीनो' के नाम पर डरा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में 'एल नीनो' से जुड़ी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी 'एल नीनो' (El Niño) से पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय, कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। 'एल नीनो' को लेकर सिर्फ बैठकें करने या भाषण देने से काम नहीं चलेगा। एक मुख्यमंत्री के तौर पर, उनका काम तेलंगाना की जनता को यह भरोसा दिलाना है कि भविष्य में आने वाली समस्याओं को ठीक से संभाल लिया जाएगा। लेकिन इसके बजाय, वे लोगों को डरा रहे हैं कि उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
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श्रीधर ने कहा मुख्यमंत्री और सरकार का काम यह सुनिश्चित करना है कि समस्याओं का समाधान निकाला जाए। लोगों को डराने-धमकाने के बजाय, उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए।" श्रीधर की यह टिप्पणी तब आई है, जब मुख्यमंत्री रेड्डी ने 'एल नीनो' के कारण लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बनने की चेतावनी दी और इस संकट से निपटने के लिए लोगों को भी इसमें शामिल करने (स्टेकहोल्डर बनाने) की जरूरत पर जोर दिया। 'एल नीनो' और ग्रेजुएट्स एमएलसी चुनावों को लेकर हुई एक बैठक के दौरान मीडिया से बात करते हुए, रेड्डी ने बताया कि मौसम के बदलते खतरनाक मिजाज की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानी का संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने विदेशों और पड़ोसी राज्यों में पानी बचाने के लिए उठाए गए सख्त कदमों का भी जिक्र किया। रेड्डी ने कहा, "बहुत विकसित देश भी सूखे का सामना कर रहे हैं। 'एल नीनो' की वजह से ब्रिटेन में भी सूखा पड़ा है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पीने के पानी की राशनिंग (सीमित आपूर्ति) की जा रही है, और ऐसे निर्देश दिए गए हैं कि हर व्यक्ति को पानी की खपत 20% तक कम करनी होगी। अक्टूबर में शुरू होने वाला यह सूखा जुलाई तक चलेगा। गर्मी बढ़ेगी और पानी का वाष्पीकरण (evaporation) भी ज्यादा होगा, जिससे पानी की दिक्कतें पैदा होंगी। सिंचाई के पानी की तुलना में पीने के पानी को लेकर ज्यादा मुश्किलें आएंगी। समस्या छोटी शुरू होकर बड़ी हो जाती है, जिससे ऐसे हालात बन सकते हैं कि लोग अपने घरों से बाहर भी न निकल पाएं। लोगों को सतर्क किए बिना और उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किए बिना, हम इस सूखे का सामना नहीं कर सकते।
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मुख्यमंत्री ने संकट से जुड़ी गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए एक समर्पित प्रशासनिक ढांचा बनाने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य निवारक रणनीतियों का नेतृत्व करना और जोखिम कम करने के उपायों को सुव्यवस्थित करना है।
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