CEC Gyanesh Kumar के कार्यकाल की हो जांच, Punjab Assembly में प्रस्ताव पास

पंजाब विधानसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच का प्रस्ताव पारित किया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश इस सरकारी प्रस्ताव को सदन ने ध्वनि मत से मंजूरी दी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चर्चा के दौरान भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए देश भर में 14 करोड़ नाम हटाने का दावा किया।
पंजाब विधानसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया एवं निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग संबंधी एक सरकारी प्रस्ताव शुक्रवार को पारित किया। पंजाब विधानसभा सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कथित ‘‘वोट लूट’’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
मान ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आड़ में देशभर में 14 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव ‘‘वोट चोरी’’ के जरिये जीते गए थे। पंजाब विधानसभा का छह-दिवसीय विशेष सत्र बृहस्पतिवार को शुरू हुआ और यह 27 अक्टूबर तक चलेगा।
प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किये जाने के समय, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। हालांकि, अकाली दल के दो बागी विधायक, बसपा का एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक उपस्थित थे। विधानसभा ने इस दावे पर चिंता जताई कि नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, और सभी पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा की मांग की।
प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘यह सदन दृढ़ता से दोहराता है कि लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक का वोट कीमती है। किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से गैरकानूनी तरीके से वंचित करना संवैधानिक लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों के खिलाफ है।’’ इसमें कहा गया कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोगों के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखना और चुनाव संबंधी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘यह सदन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच व्यवस्था स्थापित करने की मांग करता है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जवाबदेही तय की जा सके।’’ इसमें कहा गया कि जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कानूनों के उल्लंघन के ठोस सबूत मिलने पर उसके विरुद्ध कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
मान ने आरोप लगाया कि देश अब ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां भाजपा सरकार-जिसे कभी जनता ने चुना था-अब यह तय कर रही है कि कौन वोट दे सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर ‘‘तानाशाही’’ ने अपना नियंत्रण कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब भी कोई विपक्षी दल ईवीएम पर सवाल उठाता है, तो भाजपा इस प्रणाली के समर्थन में आ जाती है।
अब वे सीईसी ज्ञानेश कुमार का समर्थन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि वे जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें (चुनाव) जीतने में मदद की है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।’’ चीमा ने प्रस्ताव पेश करते हुए भाजपा पर गरीबों से मतदान का अधिकार छीनने का आरोप लगाया और उसकी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने पिछले साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि भाजपा ‘‘वोट चोरी’’ के जरिये सत्ता में आई थी। आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक इंदरजीत कौर मान ने प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा और मतदान केवल मतपत्रों के जरिये कराने की मांग की। अकाली दल वारिस पंजाब दे के नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि एसआईआर प्रक्रिया विवादों में घिरी हुई है।
अन्य न्यूज़













