राम मंदिर चंदा चोरी पर गरमाई सियासत: कांग्रेस नेता Danish Ali बोले - चौकीदार ही चोर निकले

Danish Ali
ANI
अंकित सिंह । Jul 14 2026 12:55PM

राम मंदिर चंदे की चोरी को लेकर कांग्रेस नेता दानिश अली ने मौजूदा एसआईटी जांच पर सवाल उठाते हुए इसे मामले को दबाने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि रखवालों द्वारा ही चोरी स्वीकार की जा रही है, लेकिन जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है, इसलिए न्याय और जवाबदेही के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आवश्यक है।

कांग्रेस नेता दानिश अली ने राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी की जल्द जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट से कराने की मांग की है। उन्होंने मामले को दबाए जाने की आशंका जताई है और मौजूदा जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। अली ने ANI से कहा कि देखिए, यह साबित हो चुका है कि जो लोग रखवाले थे, वही चोर निकले। चढ़ावे की चोरी इतनी गंभीर घटना है कि इसकी सज़ा सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट ही तय कर सकता है।

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अली ने कहा कि चोरी की घटना पर कोई विवाद नहीं है, जहां तक ​​जांच की बात है, एक बात तो तय है – कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर रहा है कि चढ़ावे की चोरी हुई है। यहां तक ​​कि बीजेपी, आरएसएस और ट्रस्ट भी इसे मानते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जांच कौन करेगा? अली ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या वे लोग जांच करेंगे जो पहरेदार थे और जिनकी निगरानी में चोरी हुई? और क्या वह तथाकथित SIT अपनी रिपोर्ट उन्हीं को सौंपेगी? ऐसा नहीं होने दिया जा सकता।

उन्होंने इस प्रक्रिया को मामले को दबाने की कोशिश बताया और कहा कि SIT ने अपनी रिपोर्ट सबसे पहले ट्रस्ट के एक पदेन सदस्य को सौंपी। ट्रस्ट ही FIR की मांग कर रहा है और ट्रस्ट ही रिपोर्ट भी मांग रहा है। यह मामले को दबाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। इस चंदे की चोरी के तार ऊंचे ओहदे वाले लोगों से जुड़े हैं।

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अली ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की उस मांग का समर्थन किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक तय समय-सीमा के भीतर जांच की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हमारे अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से एक तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने की मांग की है। मकसद साफ और सीधा है: जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। चढ़ावे की चोरी के दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक तय समय-सीमा के भीतर जांच होनी चाहिए।

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