Manipur के कांगपोकपी में SoO शिविर पर सुरक्षाबलों का कब्जा, 17 लोग हिरासत में लिए गए

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सुरक्षाबलों ने शनिवार को कुकी-जो उग्रवादियों के सिनाई शिविर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। यह कार्रवाई शिविर में 159 पंजीकृत कैडरों के बजाय केवल एक सदस्य मिलने और 17 अनधिकृत लोगों की मौजूदगी के बाद की गई। पुलिस ने शिविर से 24 आग्नेयास्त्र, गोला-बारूद और विस्फोटक भी जब्त किए हैं।
(सौरव राय बर्मन) इंफाल, 24 अक्टूबर मणिपुर में मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार सुरक्षा बलों ने लगभग दो दशक पुराने संघर्षविराम समझौते के तहत कुकी-जो उग्रवादियों के लिए बनाए गए एक शिविर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने राज्य में ऐसे सभी 14 शिविरों की जांच करने की योजना बनाई है।
शिविर में पंजीकृत 159 कैडर में से केवल एक के मौजूद मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। इससे अभियान निलंबन (एसओओ) समझौते के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। यह समझौता चार सितंबर को नवीनीकरण के बिना समाप्त हो गया था।
यह कार्रवाई 19 अक्टूबर को नोंगशुम के पास मेइती समुदाय के तीन नागरिकों की हत्या के कुछ दिन बाद हुई है। मेइती संगठनों की ओर से लंबे समय से एसओओ शिविरों को बंद करने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने और समझौते को रद्द करने की मांग की जाती रही है। आरोप हैं कि संघर्षविराम के दायरे में आने वाले उग्रवादियों ने नागरिकों और सुरक्षाबलों पर हमले किए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नोंगशुम हत्याकांड के बाद शुरू किए गए सुरक्षा अभियानों के तहत मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संयुक्त टीमों ने शनिवार को कांगपोकपी जिले के सिनाई शिविर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को पीटीआई-भाषा को बताया, “शुक्रवार को छापा मारा गया और शनिवार को सुरक्षाबलों ने शिविर का पूरा नियंत्रण संभाल लिया। यह अभियान जारी रहेगा।
जमीनी स्थिति का पता लगाने के लिए सभी निर्धारित शिविरों की जांच की जाएगी।” अधिकारी ने बताया कि सिनाई शिविर में 159 कैडर की अपेक्षित संख्या के मुकाबले केवल एक पंजीकृत कैडर मिला। इसके अलावा 17 ऐसे लोग भी मिले, जिनकी पहचान समझौते के दायरे में आने वाले कैडर के रूप में नहीं हुई। इन 17 लोगों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
मणिपुर पुलिस ने शनिवार को एक बयान में कहा, “सभी 17 आरोपियों को 31 अक्टूबर तक आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। शिविर के प्रबंधन से जुड़े लोगों की संलिप्तता, पहचान छिपाकर दूसरे व्यक्ति के रूप में पेश होने, हथियारों पर अनधिकृत कब्जे और एसओओ के बुनियादी नियमों के उल्लंघन के संबंध में आगे की जांच की जा रही है।” बयान के अनुसार, सुरक्षाबलों ने शिविर से 24 आग्नेयास्त्र, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक, वायरलेस संचार उपकरण और युद्ध संबंधी अन्य सामान जब्त किया। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लापता कैडर के बारे में यह दलील दी गई कि उनमें से कुछ अपने घर चले गए थे, जबकि कुछ अन्य जगहों पर थे।
उन्होंने कहा कि उनके ठिकानों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या समझौते की अवधि समाप्त होने का मतलब है कि उग्रवादी अब अपने शिविर छोड़ सकते हैं, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि समझौते को औपचारिक रूप से रद्द भी नहीं किया गया है। अधिकारी ने कहा, “एसओओ समझौते का नवीनीकरण किया जाना चाहिए या नहीं, इसका फैसला केंद्र को करना है।
लेकिन जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता, तब तक कैडर और उनके हथियार निर्धारित शिविरों में ही रहने चाहिए।”
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