Gyanesh Kumar तुरंत दें इस्तीफा, SIR पर ECI के खिलाफ वामपंथी दलों ने Delhi में खोला मोर्चा

नई दिल्ली में CPI और CPI(M) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर मानव श्रृंखला बनाई। वाम दलों ने SIR को मतदाता पंजीकरण नियम 1960 का उल्लंघन बताया। CPI नेताओं ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI(M)) ने 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक 'मानव श्रृंखला' बनाकर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में गड़बड़ी का आरोप लगाया और इस प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। यह प्रदर्शन चल रहे आंदोलन का ही एक हिस्सा है। CPI के सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में यह विरोध और तेज होगा।
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उन्होंने कहा कि यह असल में हमारे चल रहे आंदोलन का ही हिस्सा है। आने वाले दिनों में हम इसे और तेज करेंगे। यह CPI(M) का विरोध प्रदर्शन है। कई साथी इसमें शामिल हो रहे हैं और 1 नवंबर को एक विशाल रैली निकाली जाएगी। हमारा विरोध मार्च और अन्य कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे। CPI के महासचिव डी. राजा ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और अधिकारियों से आग्रह किया कि जंतर-मंतर को फिर से सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में बहाल किया जाए। राजा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए, और जंतर-मंतर को लोगों के विरोध-प्रदर्शन के लिए फिर से खोल देना चाहिए।
CPI नेता एनी राजा ने भी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जो SIR प्रक्रिया चल रही है, उसे रोका जाना चाहिए। हम चाहते हैं कि सरकार इस SIR प्रक्रिया को रद्द करे और ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। हम यही मांग कर रहे हैं। इससे पहले 27 अक्टूबर को, CPI सांसद पी. संतोष कुमार ने SIR प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार्य नहीं है और यह 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' (Registration of Electors Rules, 1960) का उल्लंघन करता है।
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सुप्रीम कोर्ट में ECI द्वारा दाखिल हलफनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए, कुमार ने कहा कि चाहे यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया हो या बहुमत से, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह फैसला अनावश्यक था, स्वीकार्य नहीं है, और यह 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का उल्लंघन है। कुमार ने SIR प्रक्रिया की आवश्यकता पर सवाल उठाया और पूछा कि फॉर्म 6 में बदलाव करने की अनुमति किसने दी।
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