Jharkhand के Godda में Form 7 जमा करने पर विवाद, जांच के आदेश

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झारखंड के गोड्डा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा कराने के मामले में निर्वाचन अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। राजनीतिक दल के एजेंटों द्वारा पहले से भरे फॉर्म जमा करने पर बीएलओ के साथ विवाद खड़ा हो गया था। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी जिला निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रांची, दो सितंबर झारखंड के गोड्डा जिले में कई मतदान केंद्र पर एक राजनीतिक दल के कुछ बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए-2) द्वारा कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए जाने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। इन बीएलए ने संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को फॉर्म जमा किए, लेकिन जब एजेंट ने प्राप्ति संबंधी दस्तावेज पर बीएलओ के हस्ताक्षर मांगे तो दोनों पक्षों में विवाद हो गया।

बीएलओ ने हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए कहा कि फॉर्म में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए हैं, वे लंबे समय से संबंधित स्थानों पर रह रहे हैं और उनमें से अधिकतर के नाम 2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज हैं। बीएलओ ने फॉर्म भी कथित तौर पर वापस कर दिए। महेशटिकरी के बूथ संख्या नौ पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीएलए संजीव कुमार ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी के निर्देश पर फॉर्म जमा किए थे।

कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पार्टी ने मुझे ऐसे 25 फॉर्म दिए थे। पार्टी के निर्देश के अनुसार मैं सभी कॉलम पहले से भरे हुए फॉर्म लेकर बीएलओ के पास गया, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।’’ बूथ संख्या नौ की बीएलओ अनीसा बानो ने कहा कि कुमार ने ‘पते पर मौजूद नहीं मिले’ और ‘स्थानांतरित’ श्रेणी के तहत नाम हटाने के अनुरोध वाले प्रिंटेड फॉर्म-7 आवेदन दिए थे। बानो ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कुमार प्रिंटेड फॉर्म-7 लेकर आए थे, जिनमें कुछ नाम ‘पते पर मौजूद नहीं मिले’ और ‘स्थानांतरित’ श्रेणी में दर्ज थे।

मुझे इस पर संदेह हुआ क्योंकि फॉर्म की सभी जानकारियां प्रिंटेड थीं। इसके अलावा, फॉर्म में जिन लोगों के नाम थे, वे लंबे समय से वहीं रह रहे हैं। मैंने फॉर्म उन्हें वापस कर दिए।’’ फॉर्म-7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।

घटना के एक दिन बाद ग्रामीण कुमार के घर पर एकत्र हुए और उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। कुमार ने कहा, ‘‘मुझे धमकियां मिल रही हैं। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है।

मैंने सिर्फ पार्टी के निर्देश का पालन किया। पार्टी ने मुझे जो भी फॉर्म दिए थे, वे सभी मैंने ग्रामीणों को दे दिए।’’ कुमार ने स्वयं को भाजपा का बसंतराय प्रखंड अध्यक्ष होने का दावा किया। इसी तरह, पचुआ कित्ता के बूथ संख्या 48 के बीएलओ मोहम्मद मुखेर ने कहा कि एक राजनीतिक दल के बीएलए-2 ने उनके पास करीब 15 फॉर्म-7 आवेदन लाकर प्राप्ति दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर मांगे।

मुखेर ने दावा किया, ‘‘एक राजनीतिक दल का बीएलए-2 करीब 15 फॉर्म-7 के कागज लेकर मेरे पास आया और उसने मेरे हस्ताक्षर मांगे। मैंने उससे पूछा कि क्या उसे इस फॉर्म के महत्व की जानकारी है। बीएलए ने कहा कि उसे ये फॉर्म पार्टी से मिले हैं और उसे इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि फॉर्म जमा करने के परिणाम समझाने के बाद उन्होंने उन्हें फाड़ दिया।

मुखेर ने कहा, ‘‘मैंने उसे बताया कि फॉर्म जमा करने के बाद मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में वह गवाह होगा। बीएलए ने कहा कि उसके पास ऐसे 70 फॉर्म हैं और वह उन्हें नष्ट करने वाला है।’’ वात्रा पंचायत के मुखिया ने दावा किया कि भाजपा के बीएलए ने महेशटिकरी, पचुआ कित्ता, लोचनी और बाघाकोल—इन चार बूथ पर ऐसे फॉर्म वितरित किए थे। बसंतराय प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचक निबंधन अधिकारी श्रीमन मरांडी ने कहा कि उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मरांडी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कोई भी आपत्ति दर्ज करा सकता है। मैंने बीएलओ को निर्देश दिया है कि इन फॉर्म को आपत्ति के रूप में स्वीकार करें। किसी भी स्थिति में वास्तविक मतदाताओं के नाम नहीं हटाए जा सकते।’’ उन्होंने कहा कि बूथ संख्या नौ के मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान फॉर्म में नामित 25 में से 24 मतदाता लंबे समय से क्षेत्र में रहते पाए गए।

मरांडी ने कहा, ‘‘एक मतदाता पिछले दो महीने से गांव से बाहर है क्योंकि वह प्रवासी मजदूर है। हमें अंतिम जांच रिपोर्ट एक-दो दिन में मिलने की उम्मीद है।’’ झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) से रिपोर्ट मांगी है। कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘बीएलए बड़ी संख्या में फॉर्म जमा कर सकते हैं और बीएलओ उन्हें स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते।

हालांकि, बीएलए को यह घोषणा देनी होती है कि फॉर्म में दी गई जानकारी सही है। हमें यह जांचना होगा कि बीएलए ने घोषणा दी थी या नहीं।’’ निर्वाचन आयोग ने झारखंड में 43.61 लाख से अधिक नाम हटाने के बाद बुधवार को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की गणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य में 2.64 करोड़ मतदाता थे।

गणना प्रक्रिया के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची में 2.21 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.12 करोड़ पुरुष, 1.08 करोड़ महिलाएं और 260 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। गणना प्रक्रिया 30 जून से 29 जुलाई के बीच कराई गई थी। इस दौरान बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित किए, उन्हें एकत्र किया था और उनका सत्यापन किया था।

एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी है, जबकि संशोधित मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 19 अक्टूबर कर दी गई है। इससे पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि पांच अगस्त से चार सितंबर तक थी और अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को प्रकाशित की जानी थी।

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